“देश में इस्लामिक बैंकिंग शुरू नहीं करने का फैसला अफसोसनाक !”

“देश में इस्लामिक बैंकिंग शुरू नहीं करने का फैसला अफसोसनाक !”
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देश में इस्लामिक बैंकिंग शुरू करने के प्रस्ताव पर रोक लगाने वाले भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के फैसले पर हुर्रियत कांफ्रेंस के  अध्यक्ष मीरवायज उमर फारुक ने आज सोशल मीडिया पर तीखी प्रातक्रिया के साथ अफसोस जताया. उमर फारुक  ने आज ट्वीट कर के  कहा  कि सरकार ने इस बात से आंख मूंद ली है कि इस्लामिक बैंकिंग से लोगों और अर्थव्यवस्था को क्या क्या फायदे हो सकते हैं. आईएमएफ के अनुसार इस्लामिक (शरिया कानून के अनुरुप) वित्तीय संपत्ति में वृद्धि दर दहाई अंक में रही है और यह वर्ष 2003 के 200 अरब डालर से बढ़कर 2013 के आखिर तक 1800 अरब डॉलर हो गया. उनमें चीन, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे गैर मुस्लिम देश भी हैं. एक बड़े कदम के तहत आरबीआई ने देश में इस्लामिक बैंक शुरु करने के प्रस्ताव पर आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया है.

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