आज़ादी के बगैर समानता और भाईचारे की कल्पना बेमानी: पूर्व चीफ जस्टिस

आज़ादी के बगैर समानता और भाईचारे की कल्पना बेमानी: पूर्व चीफ जस्टिस

प्रक्रति के एतबार से इंसान में कुछ भी समानता नहीं है, कुछ लोग कुछ से बेहतर देखते हैं, कुछ लोग कुछ के मुकाबले में ज़्यादा जहीन होते हैं और वही लोग बुद्धिजीवी की हैसियत से समाज में समानता की बात करते हैं।

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इन विचारों का इज़हार पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया जगदीश सिंह खेहर ने इंस्टीट्यूट ऑफ़ ऑब्जेक्टिव स्टडीज की तीन दिवसीय इंटरनेशनल सम्मेलन के उद्घाटन बैठक में किया। उन्होंने आगे कहा कि आज़ादी की तरह समानता की कल्पना भी आज की दुनियां में राजनितिक आइडियल है, 1789 में फ़्रांसीसी क्रांतीकारी की आधार भी आज़ादी, समानता और भाईचारा थी, क्योंकि यह मजलूमों की बुनियाद थी जिन्हें सताया गया था और वह असमानता की सामाजिक हालात की झलक दिखाता था।

उन्होंने कहा कि आज़ादी के बगैर समानता और भाईचारे की कल्पना बेमानी है। इसी तरह समानता, भाईचारा आज़ादी के बगैर हासिल नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि भाईचारा आज़ादी और समानता खुद मुकम्मल नहीं है, अगर आपस में एक दुसरे का संबंध न हो, उन्होंने कहा कि संविधान 14/15/16 बहुत अहम है क्योंकि उनका संबंध भी बराबरी, इंसाफ और भाईचारे से है, उन्होंने कहा कि एक जज के तौर पर मैंने खुद भी इसका बहुत स्टडी किया है और पाया है कि इंसान पैदाइशी तौर पर बराबर नहीं है।

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