Saturday , April 21 2018

‘जब तक समाज की सोच नहीं बदलेगी दंगे होते रहेंगे’

लखनऊ: हम राजनीतिक हस्तियों और धार्मिक नेताओं ने गुरुवार को एक प्लेटफार्म से यह पैगाम देने की कोशिश की कि देश में आज सबसे ज्यादा जरूरी है धर्म और जात और बिरादरी के नाम पर फैलाई जा रही नफरत पर लगाम लगाने की। उनका कहना था कि मौजूदा सरकार अगर यह काम नहीं कर रही है तो यह काम खुद समाज को करना होगा वरना आपसी भाईचारा, एकता और गंगा जमुनी तहजीब की हमारी साझी विरासत चाक होकर रह जायेया।

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उनके मुताबिक यह हम तमाम शांति पसंद नागरिकों की जिम्मेदरी है कि इस माहौल को बदलने के लिए पहले अपनी सोच बदलें, क्योंकि यह समाजिक सोच ही होती है जिस की वजह से एसी शक्तियों को विस्तार मिलने लगता है जो देश में साम्प्रदायिकता और जातीय माहौल पैदा करती है।यह महिलाएं आज यहाँ स्थित इंदिरा गाँधी प्रतिष्ठान में ‘पीस डाइलोग’ कार्यक्रम से मुखातिब थे, जिसका आयोजन यूएन पीस यूनिवर्सिटी, आईसेक और सिटिजन फॉर्म (लखनऊ) ने किया था। उसके कन्वेनर मोहम्मद अब्बास हैदर थे। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया जिन में विदेशों के प्रतिनिधि और छात्र भी थे।

अपने संबोधन में सांसद वरून गाँधी ने कहा कि आज गरीब खो सा गया है जबकि हर तरफ गरीबी ही गरीबी है। उन्होंने अपने भाषण में आर्थिक स्थिति पर ही फोकस रखा और यह माना भी कि जब तक आर्थिक तंगी खत्म नहीं होगी समाजी बिखराव और तकरार खत्म होना मुशकिल है। उन्होंने बताया कि पिछले 10 सालों में ऐसे एक लाख 28 हजार किसान गिरफ्तार किए हैं जिन पर 25 हज़ार या उस से ज्यादा का लोन था, लेकिन जिन पर करोड़ों का बकाया है वह आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने कह कि तालिबान ने अब तक लगभग 3000 लोगों को मारा है मगर हमारे देश में 2016 में ही 9000 किसानों ने ख़ुदकुशी की थी।

सीपीआई के राष्ट्रीय सेक्रेटरी अतुल कुमार अंजन ने सख्त बयान देते हुए कहा कि जिन्हें भागवत गीता, वेद, उपन्श्द और किसी भी धार्मिक किताब की जानकारी नहीं वह वह धर्म के ठेकेदार बन कर दंगे कराते रहते हैं। अतुल कुमार अनजान ने कहा कि आब भी जुनेद, अखलाक और उन जैसे कई लोगों को सिर्फ इसलिए हत्या किया जा रहा है क्योंकि वह उन नफरत फ़ैलाने वालों के धर्म से नहीं हैं।

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