शोलापुर उर्दू किताब मेला- क्या उर्दू से मोहब्बत सिर्फ दिखावा तो नहीं ?

शोलापुर उर्दू किताब मेला- क्या उर्दू से मोहब्बत सिर्फ दिखावा तो नहीं ?
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हर साल लगने वाला उर्दू किताब मेला इस साल शोलापुर में आयोजित किया  गया  है  उर्दू के विकास के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद और स्थानीय स्वयं सेवी संस्थान  बज्मे -ग़ालिब द्वारा महारास्ट्र के शोलापुर में शनिवार से 21 वां राष्ट्रीय उर्दू पुस्तक मेला का आयोजन किया गया है। मेले का  उद्घाटन सोलापुर की महापौर श्रीमती शोभा बंसट्टी ने किया। 

PIC Courtesy- theshahab

यह नौ दिवसीय मेला एम ए पंगल एंग्लो उर्दू हाई स्कूल  मैदान पर आयोजित किया गया है। इस मेले में देशभर के 90 से जायदा  प्रकाशकों की विभिन्न विषयों पर पुस्तकें प्रदर्शित की गई हैं। 

नौ दिवसीय मेले में पांचवे दिन भी छाया रहा सन्नाटा ! 

मेले में आए लोगों के साथ स्टाल लगाने वाले ज़्यादातर प्रकाशकों का मानना है कि राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद द्वारा मात्र अखबारों में मेले के विज्ञापनों के अलावा और कुछ न करने से ही ये नौबत आई है।

किताब मेले में ख़ाली पड़े स्टाल

वही शोलापुर के आस पास के इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि उनको मेले के बारे में जानकारी ही नहीं थी। कुछ लोग ने बताया जब हम स्कूल  के करीब से गुजरे तब उन्हें इसकी सूचना मिली।

प्रकाशकों का आरोप
मेले में पांचवे  दिन भी लगातार उर्दू प्रेमियों के न पहुंचने से मायूस प्रकाशकों ने मेला आयोजकों पर आरोप लगाया कि प्रचार-प्रसार का कोई खास इंतजाम नहीं किया गया है। फरीद बुक डिपो के हारुन कहते हैं कि यहाँ आसपास रहने वालों के अलावा और भी लोगों को पता नहीं है कि उर्दू किताब मेला लगा है। यहाँ सिर्फ स्कूल के बच्चे ही आ रहे हैं यही वजह है कि मेले में जो भीड़ शुरू से उमड़नी चाहिए थी, नहीं पहुंच रही है।

दिल्ली से आये एम आर पब्लिकेशन  के अब्दु समद देहलवी का कहना है की हम यहाँ बड़ी उम्मीद के साथ आये थे लेकिन हमें अफ़सोस है की यहाँ के लोगों को शायद किताबो का पता नहीं किताब क्या होती है बुक फेयर क्या होता है , उन्होंने शोलापुर के लोगों से अपील भी की , उन्होंने कहा अभी भी 4 दिन का वक़्त है शोलापुर के लोगों को दिल खोल कर किताबें खरीदनी चाहिये।

एक सवाल के जवाब में 100 नेशनल और इंटरनेशनल बुक फेयर कर चुके अल हसनात बुक के शहज़ाद आलम कहते हैं कि अभी तक तो कुछ नहीं हुआ और बचे चार दिन में  आप कोई मिरेकल नहीं कर सकते, उन्होंने यहाँ की लोकल बॉडी के कार्यों पर सवाल करते हुए इसे मिस प्लानिंग बताया , शहज़ाद कहते हैं ‘ यहाँ की लोकल बॉडी की ज़िमेंदारी बनती है की वो लोगों  को कैसे घर से बाहर लाये’.

महाराष्ट्र के अकोला से आए इक़रा एजुकेशन के शकील का  मानना है कि राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद ने पिछले साल भ्विंडी में  किताब मेले का आयोजन किया था, लोगों का हुजूम देखते बनता था और वहां खरीदारी भी होती थी । ऐसा नहीं है यहाँ लोग खरीदारी नहीं कर रहे लेकिन, यहां पर लोगों के पास पैसे की कमी है , ख्वाहिशें बहुत है लेकिन वो मजबूर हैं ।

किताब मेले में ख़ाली पड़े स्टाल

वहीँ दिल्ली से आये अजरा बुक ने बताया  हमें यहाँ मायूसी ही हाथ लगी है।  यहाँ सिर्फ बच्चे ही बच्चे हैं , उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में लोग आएंगे।

दिल्ली की रहने वालीं नाजमा ने भी हनी बुक के नाम से स्टाल लगा रखा है  , वो कहती हैं , हम इस किताबी मेले से ख़ुश हैं लोगों का अच्छा रिस्पांस मिल रहा है

दिल्ली से आये एक और पब्लिशर फरोस मीडिया मिल्ली गजट के कौसर उस्मान कहते हैं  कि शोलापुर में रीडरशिप नहीं है इस लिए लोग नहीं आ रहे हैं। इसलिए यहां किताबों की बिक्री नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया हम उर्दू की किताबें अपने साथ लाये हैं लेकिन यहाँ हिंदी और मराठी की मांग ज़्यादा है , उस्मान सवाल करते हुए कहते हैं कहीं ये उर्दू से मोहब्बत एक दिखावा वाली बात तो नहीं ।  उन्होंने उम्मीद जताई कि मेले के आखिरी चार दिनों में लोग आयेंगे ।

नाम न छापने की शर्त पर एक दो लोगों ने यहाँ की तंजीमो पर भी आरोप लगाया ।  शोलापुर के रहने वाले कमर ( बदला हुआ नाम) कहते हैं असल में यहाँ पर दो तंजीमों में आपसी टकराव की वजह से भी ये किताबी मेला फ्लॉप हो रहा है । जिसकी पुष्ठी सिआसत नहीं कर पाया ।

वहीँ राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के लोगों के मुताबिक प्रचार प्रसार की कोई कमी नहीं रखी गई।  अखबारों को विज्ञापन दिया गया।  फिर भी हमारी कोशिश है कि मेले की जानकारी आम लोगों तक पहुंचे ताकि लोग ज़यादा से ज़यादा फायदा उठा सकें।

 

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