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US की रिपोर्ट में भारत की लॉ एंड अॉडर पर सवाल

मानवाधिकार की स्थिति को लेकर अमेरिकी गृह राज्य विभाग की रिपोर्ट में भारत की तीखी आलोचना की गई है। 2015 की रिपोर्ट के ‘एक्स्ट्रा जुडिशल किलिंग’ अनुभाग में पिछले साल 7 अप्रैल को 20 संदिग्ध चंदन तस्करों के ‘एनकाउंटर’ का जिक्र किया गया है। इसके अलावा इसी दिन तेलंगाना पुलिस द्वारा जेल से हैदराबाद कोर्ट ले जाते समय नालगोंडा में पांच आतंकियों को गोली मारने की घटना को भी इसमें शामिल किया गया है।

इन दोनों ही ‘एनकाउंटरों’ की जांच अलग-अलग एसआईटी कर रही हैं। भारत में ‘मनमानी गिरफ्तारियों’ का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में प्रतिबंधित संगठन सिमी के लिए काम करने से आरोपमुक्त हुए 14 लोगों के मामले को शामिल किया गया है। इनपर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था लेकिन खंडवा की अदालत ने 30 सिंतबर को इन्हें बरी कर दिया था।
पीपल्ल यूनियन ऑफ डेमोक्रैटिक राइट्स और जामिया टीचर्स सॉलिडेरिटी असोसिएशन ने मध्य प्रदेश में 2001-12 के दौरान दर्ज किए गए 75 यूपीए केसों में पुलिस दुर्भावना का आरोप लगाया था। ये केस कथित तौर पर सिमी के सदस्यों और उनके दोस्तों-संबंधियों पर दर्ज किए गए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पीपल्स यूनियन और शिक्षक संगठन ने दावा किया है कि इन केसों में लोगों को फंसाया गया। उनका सिमी से कोई संबंध नहीं था। रिपोर्ट में मालेगांव ब्लास्ट केस में एनआईए द्वारा कथित तौर पर हमले में शामिल हिंदुत्व आतंकी तत्वों पर ढिलाई बरतने का भी जिक्र किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मालेगांव ब्लास्ट (2008) केस में निष्पक्ष सुनवाई के लिए दाखिल एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार और एनआईए से जवाब देने को कहा था। इन केसों में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर रोहिणी सलियान ने हाई कोर्ट में एक ऐफिडेविट देकर एनआईए के उन अफसरों का नाम बताया जिन्होंने उनसे केस में नरमी बरतने को कहा।

सलियान ने एक इंटरव्यू में आरोप लगाया था कि एनआईए के कुछ अधिकारियों ने इस मामले में गिरफ्तार हिंदू चरमपंथियों के पक्ष में काम करने का दबाव बनाया था। अमेरिकी रिपोर्ट में इसका भी जिक्र है। रिपोर्ट में लगातार नजरबंद/गिरफ्तार की गईं कश्मीर की दुख्तरन-ए-मिल्लत की चीफ असिया अंद्राबी के मामले को भी शामिल किया गया है।

पिछले साल 17 अगस्त को पाकिस्तान स्वतंत्रता दिवस के दिन पाकिस्तान का झंडा लहराने के लिए असिया को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद छूटने के तुरंत बात 18 सितंबर को कथित पर गाय की हत्या करने के आरोप में फिर गिरफ्तार कर लिया गया। बेल पर असिया बाहर निकलीं तो 2 नवंबर को उन्हें गैरकानूनी गतिविधियों से रोकथान ऐक्ट के गिरफ्तार कर लिया।

इस मानवाधिकार की रिपोर्ट में मणिपुर में 4 जून को नगा विद्रोहियों के हमले में मारे गए 20 सेना के जवानों के मामलों को भी शामिल किया है। इसके बाद कथित तौर पर आर्मी स्पेशल फोर्स ने 9 जून को बदला चुकाते हुए बर्मा की जमीन पर 30 से 70 विद्रोहियों को मारने का दावा किया था।

Source – NBT

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