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कैराना के भाजपा सांसद हुकुम सिंह का निधन

भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता सांसद हुकुम सिंह का निधन हो गया.  नोएडा के जेपी अस्पताल में उनके अंतिम सांस लेने की खबर का हालांकि उनकी पुत्री ने खंडन किया है।
सांसद हुकुम सिंह की तबीयत कुछ समय से खराब चल रही थी. पहले भी उन्हें कई दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था. सांस लेने में दिक्कत बढ़ने की वजह से उनके परिवार के लोगों ने उन्हें नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल में भर्ती कराया था. जहां उनका इलाज चल रहा था.

हुकुम सिंह मुजफ्फरनगर जिले के कैराना में ही रहते हैं. उनका जन्म 5 अप्रैल 1938 को हुआ था. बचपन से ही वह पढ़ाई में काफी होशियार थे. कैराना में इंटर की पढ़ाई के बाद आगे की पढ़ाई के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय भेजा गया. वहां पर हुकुमसिंह ने बीए और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की.

हुकुम सिंह के राजनीति के सफर की शुरुआत 1974 में हुई. जब उन्होंने इलाके के जनआंदलनों में हिस्सा लिया और लोकप्रिय होते चले गए. उनकी लोकप्रियता के चलते 1974 में ही कांग्रेस और लोकदल दोनों ने उनके सामने अपनी पार्टी से चुनाव लड़ने की पेशकश कर दी. हुकुम सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. इसके बाद हुकुम सिंह उत्तर प्रदेश की विधानसभा के पहली बार सदस्य बने.

1980 में हुकुम सिंह ने पार्टी बदली और लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़ा और इस पार्टी से भी चुनाव जीत गए. तीसरी बार 1985 में भी उन्होंने लोकदल के टिकट पर ही चुनाव जीता और इस बार वीर बहादुर सिंह की सरकार में मंत्री भी बनाए गए. बाद में जब नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने हुकुम सिंह को राज्यमंत्री के दर्जे से उठाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया.

हुकुम सिंह को 1981-82 में लोकलेखा समिति का अध्यक्ष भी बनाया गया. 1975 में उत्तरप्रदेश कांग्रेस समिति के महामंत्री भी बने. 1980 में लोकदल के अध्यक्ष भी बने और 1984 में वे विधानसभा के उपाध्यक्ष भी रहे. 1995 में हुकुमसिंह ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और चौथी बार विधायक बने. कल्याण सिंह और रामप्रकाश गुप्ता की सरकार में वे मंत्री रहे.

2007 में हुए चुनाव में भी वे विधानसभा पहुंचे. 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के आरोप भी हुकुम सिंह पर लगे. 2014 में भाजपा के टिकट पर गुर्जर समाज के हुकुम सिंह ने कैराना सीट पर पार्टी को विजय दिलाई. इस लोकसभा चुनाव में पार्टी को उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व सफलता मिली. उनको जानने वाले और उनको मानने वाले तो यह तक मान रहे थे कि नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें मंत्री पद भी मिलेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

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