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मुजफ्फरनगर दंगा: केस वापसी पर पीड़िता परिवार गुस्से में, कहा- मेरे अपने लोग मारे गये

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से मुजफ्फरनगर दंगे के आरोपियों पर से केस वापसी की प्रकिया पीड़ितों के लिए जख्मों को हरा करने वाली है। मुजफ्फरनगर और शामली में रहने वाले पीड़ित इस फैसले से आहत हैं। उनका कहना है कि यह आश्चर्यचकित है। हम बहुत गुस्से में हैं कि सरकार मामले को वापस लेने की सोच रही है।

इन दंगों से पीडित मैमूना कहती हैं कि मेरे ससुर इन दंगों में मर गए थे, किसी व्यक्ति ने उसे हत्या कर दी थी। यह वापसी वाली सूची के 131 मामलों में से एक मामला है। 13 हत्या के मामलों में छह की पड़ताल में कई तथ्य सामने हैं। इनमें से एक मामला 7 सितंबर- 2013 को मुजफ्फरनगर के शाहपुर पुलिस स्टेशन दर्ज़ है जिसके अनुसार भीड़ ने एक महिला पर हमला कर उसकी हत्या कर दी थी।

यह घटना पल्लदा गांव की है जिसकी पीड़ित महिला अफसाना (35) है लेकिन किसी भी अभियुक्त की पहचान नहीं हुई है। मामले की अंतिम रिपोर्ट 15 नवंबर-2014 को दायर की गई। परिवार पल्लदा में रह रहा है, अफसाना के पति रईस को मुवाअजे में सरकारी नौकरी मिली जहां उसकी 19 हजार रुपये तनख्वाह है। हमने बहुत पहले ही उस समय उम्मीद खो दी थी जब एक वकील ने हमें बताया कि मामला बंद हो गया है और फिर कोई हमारे पास नहीं आया।

रईस ने कहा कि उस दिन के बाद पहली बार कोई व्यक्ति हमारे घर आया है। उन्होंने अभी तक अपनी पत्नी की हत्या से संबंधित सभी दस्तावेजों को बचाकर रखा है। दूसरा मामला एफआईआर नंबर 143 का है जो 8 सितंबर 2013 की है और मुजफ्फरनगर के फुगाना पुलिस स्टेशन में दर्ज़ हुई जिसमें लांक गाँव में 3 लोगों कासिम (65), अबुल हसन (70) और इकबाल (55) की हत्या हुई थी लेकिन इसके अभियुक्त अभी भी अज्ञात हैं जिसकी क्लोजर रिपोर्ट 11 सितंबर-2014 को दर्ज हुई।

एफआईआर नंबर 137 जो 8 सितंबर-2013 को मुजफ्फरनगर के भोरकाला पुलिस स्टेशन में दर्ज़ हुई थी जो मोहम्मदपुर-रायसिंह गांव की है और इसमें राहुद्दीन (62) की हत्या का मामला है जिसमें 22 अभियुक्त सभी हिन्दू हैं और मामले की स्थिति ट्रायल पर है।
इसी तरह एफआईआर नंबर 137 है जो 8 सितंबर-2013 को मुजफ्फरनगर के फुगाना पुलिस स्टेशन में दर्ज़ हुई और इसमें खराद गांव के मोहम्मद सगीर (80) की हत्या की गई थी। सभी 12 आरोपी हिन्दू हैं और मामला ट्रायल पर है।

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