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अवध यूनिवर्सिटी बेगम अख्तर के नाम पर 60 करोड़ की लागत से संगीत अकादमी बनाएगी

बेगम अख्तर (अख्तरीबाई फैजाबादी) की विरासत को संजोने के लिए एक शिक्षण संस्थान आगे आया है। डॉक्टर राममनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी ने ‘बेगम अख्तर संगीत कला अकादमी की स्थापना करने का फैसला लिया है। जानकारी के मुताबिक यूनिवर्सिटी ने प्रस्तावित योजना के कंस्ट्रक्शन और अकादमी के स्वरूप का पूरा खाका तैयार कर लिया है।

यूनिवर्सिटी की खाली पड़ी 36 एकड़ जमीन पर 9 हजार 951 वर्गमीटर पर करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से एकेडमी का भव्य निर्माण होगा। यूनिवर्सिटी वीसी मनोज दीक्षित ने बताया कि प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए 18 महीने की समयावधि निर्धारित की गई है। भारतीय शास्त्रीय संगीत के सात बुनियादी सा, रे, गा, मा, पा, धा और नी के नाम पर विंग बनाएंगे। यहां एक छात्र पहले सा में अध्ययन करेंगे।

अकादमी में बेगम अख्तर से जुड़ी चीजों का एक भव्य म्यूजियम होगा। इसमें बेगम के दुर्लभ रिकॉर्ड्स, फ़िल्में, तस्वीरें और जीवन से जुड़ी तमाम दूसरी संग्रहों का कलेक्शन किया जाएगा। बेगम की परंपरा के शास्त्रीय संगीत के शिक्षण और प्रशिक्षण पर जोर दिया जाएगा।

मनोज दीक्षित के मुताबिक बेगम पर रिसर्च करने वाले स्कॉलर्स को इससे काफी सहूलियत मिलेगी। उन्हें तमाम चीजें दुनिया में एक ही जगह मिल जाएंगी। अवध यूनिवर्सिटी उसी जगह है जहां से महज 5 किलोमीटर दूर भदरसा नाम के गांव में 7 अक्टूबर 1914 को बेगम अख्तर का जन्म हुआ था।

मनोज दीक्षित ने कहा कि लागत का कुछ हिस्सा यूनिवर्सिटी फंड से होगा, कुछ फंड चैरिटी या दूसरों की मदद से जुटाएंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की संस्कृति मंत्रालय से कुछ न कुछ मिल जाएगा। उधर, दस्तावेजी फिल्म निर्माता शाह आलम ने यूनिवर्सिटी की पहल का स्वागत किया है।

उन्होंने कहा, “अवध में बेगम के चाहने वाले लंबे वक्त से सरकार से ऐसी व्यवस्थित पहल की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन इतने वर्षों में किसी ने कुछ नहीं किया। जन्मशती वर्ष में केंद्र सरकार ने बेगम के नाम पर 5 रुपये का सिक्का जारी किया था। पुरस्कारों की बंदरबाट में यूपी की अखिलेश सरकार ने 5 लाख के अवॉर्ड की घोषणा से अपना दायित्व पूरा कर लिया।

शाह आलम ने कहा कि बहुत दुःख होता है जब अवध में बेग़म अख्तर की स्मृतियां, उनकी परंपरा उनके ही जन्मस्थान में नजर नहीं आतीं’। जिस फैजाबाद में उनका जन्म हुआ वहां की एक पूरी पीढ़ी उनकी शख्सियत से अंजान है। ऐसा इसलिए है कि उनकी मौत के सालों बाद इसे सहेजने की कोशिश ही नहीं हुई। शाह ने कहा, बेगम जिस भदरसा में पैदा हुई थीं वो घर अब खंडहर है।

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