Wednesday , December 13 2017

जान बचाने में संविधान नागरिकता नहीं देखता, हमें रोहिंग्या मुसलमानों की मदद करनी चाहिए: वरुण गाँधी

जहां मोदी सरकार रोहिंग्या शरणार्थियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बता रही है वहीं उसकी पार्टी के सांसद वरुण गांधी ने रोहिंग्याओं की मदद करने की अपील की है।

नवभारत टाइम्स में “रोहिंग्या शरणार्थियों को यूं न ठुकराएं” शीर्षक से लिखे एक लेख में वरुण गांधी ने लिखा, “हमें रोहिंग्या शरणार्थियों को शरण जरूर देनी चाहिए लेकिन इससे पहले वैध सुरक्षा चिंताओं का आकलन भी करना चाहिए।”

उन्होंने लिखा, “आजादी के बाद से करीब चार करोड़ शरणार्थी भारत की सीमा लांघ चुके हैं और अभी रोहिंग्याओं के बांग्लादेश पहुंचने के साथ ही हमारी सरहद पर एक और शरणार्थी संकट आ खड़ा हुआ है। दुनिया में कुल 6.56 करोड़ लोगों को जबरन उनके देश से निकाल दिया गया है जिसमें 2.25 करोड़ लोगों को शरणार्थी माना गया है।”

वरुण गांधी ने रोहिंग्या संकट पर चिंता जताते हुए कहा, “इसके अलावा एक करोड़ लोग और हैं जिन्हें राष्ट्रविहीन माना जाता है। इन्हें कोई भी राष्ट्रीयता हासिल नहीं है और ये लोग साफ-सफाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और साधिकार रोजगार के बुनियादी अधिकारों से भी वंचित हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) की रिपोर्ट के अनुसार संघर्ष और उत्पीड़न के कारण हर मिनट औसतन 20 लोग अपने घरों से बेघर किए जा रहे हैं।”

बीजेपी सांसद ने कहा, “भारत ने शरणार्थियों को लेकर बहुत सी मानवाधिकार संधियों (आईसीसीपीआर, आसीईएससीआर, सीआरसी, आईसीईआरडी, सीईडीएडब्ल्यू) पर हस्ताक्षर किया है। सभी संधियों में उन्हें वापस न भेजने का संकल्प दोहराया गया है लेकिन ऐसे संकल्पों का पालन करने के लिए स्थानीय स्तर पर कोई कानून नहीं बनाया गया है।”

उन्होंने कहा, “हमारा संविधान जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देते हुए आदेश देता है कि ‘राज्य बिना नागरिकता का भेद किए सभी इंसानों के जीवन की सुरक्षा करेगा’ (राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, 2014)। वैसे शरणार्थियों के मामले में किसी निश्चित व्यवस्था के अभाव में यह मसला अब भी अलग-अलग मामले के अनुसार ही तय होता है (रिफ्यूजी लॉ इनीशिएटिव, वर्किंग पेपर, 11, 2014)। हाल के दिनों में राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में जनता और संस्थागत सहानुभूति को भी सीमित कर दिया गया है।”

वरुण गांधी ने अपील करते हुए कहा, “हमें रोहिंग्या शरणार्थियों को शरण जरूर देनी चाहिए लेकिन इससे पहले वैध सुरक्षा चिंताओं का आकलन भी करना चाहिए। स्वाभाविक रूप से अधिकांश शरणार्थी अपने घर लौटना चाहेंगे। हमें शांतिपूर्ण उपायों से अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए उन्हें स्वेच्छा से घर वापसी में मदद करनी चाहिए। आतिथ्य सत्कार और शरण देने की अपनी परंपरा का पालन करते हुए हमें शरण देना निश्चित रूप से जारी रखना चाहिए।”

बता दें कि केंद्र सरकार ने रोहिंग्या शरणार्थियों को अवैध और देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए भारत से वापस भेजने की योजना पर 18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में 16 पन्नों का एक हलफनामा दायर किया था।

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