Tuesday , December 12 2017

VIDEO: राजनीति चमकाने के लिए बीजेपी राम को याद करती है- ओवैसी

नई दिल्ली: अयोध्या मामले पर अगली सुनवाई अगले साल 8 फरवरी को होगी लेकिन उसके पहले ही देश की राजनीति गरम हो गई है। देश की सबसे बड़ी अदालत में जहां देश के इस सबसे बड़े मसले की सुनवाई हो रही है वहीं दूसरी ओर इस पर आरोप-प्रत्यारोप का भी दौर जारी है। इस खास मसले पर एक निजी टीवी चैनल बातचीत में एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी से 12 सवाल पूछे।

ये एक संयोग है कि बाबरी मस्ज़िद गिराये जाने के पच्चीस साल पूरे होने से ठीक एक दिन पहले देश की सबसे बड़ी अदालत में इस पर सुनवाई शुरू हुई और ये सुनवाई शुरू होते ही देश में चर्चा का विषय बन गई। कपिल सिब्बल ने सुनवाई को जून 2019 तक टालने की मांग की तो दूसरे पक्ष जल्द सुनवाई पर अड़ गये। वहीं असदउद्दीन ओवैसी ने कपिल सिब्बल का समर्थन करके कांग्रेस की मुश्किल बढ़ा दी।

असदुद्दीन ओवैसी ने जो कहा-
अयोध्या का मसला केवल कोर्ट का मसला नहीं
सिब्बल-धवन जैसे वकीलों ने पुरजोर तरीके से पक्ष रखा
सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील के तौर पर सिब्बल ने दलील दी
बीजेपी इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश में जुटी है
महंगाई और GST से ध्यान हटाने की बीजेपी की कोशिश
बीजेपी 2019 के चुनाव में इस मुद्दे को भुनाना चाहती है
बीजेपी आस्था और कानून का टकराव कराना चाहती है
ये आस्था नहीं.. देश के संविधान से जुड़ा मुद्दा है
बाबरी विध्वंस से जुड़े लोगों को बीजेपी बचा रही है
आरोपियों को मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में जगह दी गई
बाबरी विध्वंस की सुनवाई अबतक पूरी क्यों नहीं हुई ?
संविधान संवत देश चलाने की जिम्मेदारी सभी दलों की
मैं इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा हूं, बाबर इतिहास का हिस्सा
बाबरी विध्वंस के बाद ही सुप्रीम कोर्ट में मसला आया
चुनाव में अयोध्या को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है
बीजेपी अयोध्या मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है
मुझ पर बीजेपी बेबुनियाद आरोप लगा रही है
सियासत चमकाने के लिए बीजेपी को राम याद आए
हिंदुस्तानी मुसलमान हूं मैं, संविधान से मुझे इंसाफ चाहिए
सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने वाले वकील किसी पार्टी के नहीं
2019 तक इस मामले की सुनवाई टलनी चाहिए

सुनवाई के लिए संवैधानिक पीठ मांग बनाने की मांग जायज
बाबरी विध्वंस के पच्चीस साल हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनावई की अगली तारीख भी तय कर दी है और गुजरात चुनाव का घमासान भी चल रहा है ऐसे में कोई भी सियासी समीकरणों का फायदा उठाने से चूकना नहीं चाहता।

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