VIDEO- रोहित वेमुला की मृत्यु की दूसरी बरसी : भावुक हो गए परिजन और दोस्त

VIDEO- रोहित वेमुला की मृत्यु की दूसरी बरसी : भावुक हो गए परिजन और दोस्त
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रोहित वेमुला ने दो साल पहले 17 जनवरी 2016 को मौत को गले लगा लिया था। घटना के दो साल बाद हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में उसके दोस्तों परिवार के लोगों से बातचीत के दौरान वे भावुक हो गए। उसकी मौत दलित अधिकार आंदोलन में एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गई थी। रोहित की मां राधिका कहती हैं कि उनकी दत्तक मां अंजनी देवी ने उनको 10 वीं कक्षा तक पढ़ाई करने की अनुमति दी थी। 14 वर्ष की ही आयु में ओबीसी वाडेरा समुदाय के सदस्य मणि कुमार से उनकी शादी हुई और उन्होंने रोहित को जन्म दिया। वह रोहित के बचपन को याद करती हैं और अकेलेपन के लिए खुद को दोषी मानती हैं। राधिका कहती हैं कि मेरी माँ ने कभी भी अच्छे अंक लाने पर मेरे बच्चों की सराहना नहीं की। उसको ईर्ष्या होती थी क्योंकि उसके बच्चों ने कभी भी अच्छी पढ़ाई नहीं की। हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पूर्व अस्थायी संकाय प्रोफेसर कार्तिक बिट्टू और रोहित के एक मित्र रोहित को बुद्धिमान छात्र के रूप में याद करते हैं। कार्तिक बिट्टू के अनुसार मैंने रोहित से कहा था कि वह अविश्वसनीय रूप से अच्छी तरह से पढ़ता था। लेकिन वह वह अन्य लोगों की तरह खुद को बुद्धिमान नहीं मानता था। हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (एचसीयू) के उमा महेश्वर के रूम नंबर 207 में रहते थे। एचसीयू छात्रावास से अपने निष्कासन के बाद रोहित अक्सर पीएचडी डॉक्टरेट की समीक्षा समिति के लिए अध्ययन और शोध के लिए कमरा 207 में समय बिताते थे। हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के चालीस वर्षों में दो शोध छात्रवृत्ति पाने वाले उमा उसके वरिष्ठ थे। वह बौद्धिक रूप से उत्कृष्ट और मानसिक रूप से बहुत मजबूत थे। वह हमेशा एक दलित प्रतीक बनना चाहते थे और संघर्ष को आगे बढ़ाते थे। उसके साथी विजय कुमार और शेषअय्या केमुदुग्नाटा को छात्रावास से प्रतिबंधित किया गया। शेषअय्या और विजय अपने अनुभवों के बारे में बताते हैं कि कॉलेज के छात्रावास और सुविधाओं से प्रतिबंधित होने के कारण उन्हें एक दर्दनाक स्थिति का सामना करना पड़ा। एक अन्य साथी विजय कुमार ने भी अपनी बात रखी तथा कहा कि हमारे पास कोई विकल्प नहीं था जब हम कॉलेज में आए तो हमने सोचा था कि यह बेहतर होगा, लेकिन जातिवाद और अस्पृश्यता ने यहां का रूप ही बदल दिया। शेषअय्या चेमुदुगंटा ने कहा कि जब हम बच्चे थे तब मेरी बहन और मैं उनके साथ उच्च जाति के सदस्य के घर गए थे और वहां हमसे काम करवा कर नौकरों की तरह व्यवहार किया गया था।

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