Thursday , September 20 2018

VIDEO: तीन तलाक़ बिल के खिलाफ़ लाखों मुस्लिम महिलाओं का विरोध प्रदर्शन, मीडिया ने बनाई दुरी

हैदराबाद। तीन तलाक़ बिल के खिलाफ़ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सपोर्ट में मालेगांव में लाखों की संख्या में प्रदर्शन निकाला। हैरानी की बात यह है कि साजिश के तहत चंद मुस्लिम महिलाओं ने जब तीन तलाक़ का विरोध किया तो टीवी चैनलों ने ज्यादातर वक्त इस बात को लेकर डिबेट और चर्चा की।

लेकिन वहीं जब लाखों की संख्या में मुस्लिम महिलाओं ने मोदी सरकार के तीन तलाक़ बिल का विरोध किया तो किसी भी मेन स्ट्रीम मीडिया ने नहीं दिखाया। जो अखबार देश के अहम और बड़े मुद्दों को दरकिनार कर तीन तलाक़ बिल के सपोर्ट में लिखा, उसके किसी भी पन्नों में यह तस्वीर नहीं छपी।

मुसलमानों और इसलाम को साजिश के तहत बदनाम करने वाली मीडिया इस विरोध को नहीं दिखा रही है। जिस देश में बेरोजगारी जैसे बड़े मुद्दे हो, बिकाऊ मीडिया लगातार तीन तलाक़ और मुस्लिम महिलाओं की फर्जी हक़ पर खुब चिल्लाई, लेकिन अंध मीडिया को यह तीन-तलाक़ बिल पर विरोध और मुस्लिम पर्सनल लॉ का सपोर्ट करता यह भीड़ नहीं नज़र आई।

मौजूदा सरकार की चापलूसी करने वाले मीडिया हाउस इस महा विरोध को नहीं दिखाया। शरीयत के लिए मुस्लिम महिलाओं ने सिर्फ़ मालेगांव में ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों और राज्यों में जुलूस निकाला। बिहार, उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र जैसे राज्यों में तो हजारों और लाखों की संख्या में रास्ते पर उतर आईं पर्दा करने वाली हमारी औरतें।

मालूम हो कि प्रस्तावित तीन तलाक बिल के विरोध में हजारों मुस्लिम महिलाओं ने यहां मौन मार्च में हिस्सा लिया। इसका आयोजन अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के स्थानीय चैप्टर और विभिन्न धार्मिक संगठनों द्वारा किया गया था।

एनसीपी, कांग्रेस और जनता दल ने मोर्चे को समर्थन दिया और एटीटी हाई स्कूल से मोर्चा शुरू हुआ और अतिरिक्त जिलाधिकारी के कार्यालय में समाप्त हुआ। प्रतिभागियों ने मांग की कि इस बिल को निरस्त किया जाए और सरकार पर्सनल लॉ में कोई हस्तक्षेप न करें। एक प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त कलेक्टर को एक ज्ञापन प्रस्तुत किया।

एक अधिकारी ने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस ने अतिरिक्त पुलिसबल को तैनात किया था। लोकसभा ने पिछले दिनों मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) विधेयक-2017 को पारित किया गया था जबकि बिल वर्तमान में राज्यसभा में लंबित है।

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