VIDEO: मुसलमानों ने अपना समर्थन नहीं दिया होता तो संविधान में दलितों को हक़ नहीं मिलता- रज रत्न अम्बेडकर

VIDEO: मुसलमानों ने अपना समर्थन नहीं दिया होता तो संविधान में दलितों को हक़ नहीं मिलता- रज रत्न अम्बेडकर

देश को एक बेहतरीन संविधान देने वाले बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर को कौन नहीं जानता है। लेकिन उनके पर पोते राज रत्न अम्बेडकर की भी सुनिए! राज रत्न अम्बेडकर मुम्बई के एक प्रोग्राम में संविधान पर बात करने के लिए मुसलमानों को भी प्रोग्राम में शामिल किया। भीमराव अम्बेडकर के बारे में संबोधित करते हुए बताया कि आज हम यहां क्यों मुसलमानों को बुलाए हैं!

राज रत्न अम्बेडकर ने बताया कि मुसलमानों को यह बताना जरूरी है कि कैसे संविधान के निर्माण में मुसलमानों ने अपना योगदान दिया है। राज रत्न अम्बेडकर ने कहा कि जब दलितों के हक़ के लिए बाबा साहेब अम्बेडकर लड़ाई लड़ रहे थे तो इस देश में सिर्फ़ मुसलमानों ने उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि मुस्लमानों अगर बाबा साहेब अम्बेडकर को साथ नहीं दिया होता तो आज इस देश का दलित अपने हक़ से वंचित होता।

उन्होंने बताया कि देश में दलितों को सरकारी नौकरी में रिजर्वेशन, वोट करने का अधिकार और देश के संसद से लेकर एसेंबली तक पहुंचने के लिए यह हक़ सिर्फ़ मुसलमानों की वज़ह से मिल पाया है।

राज रत्न अम्बेडकर ने हवाला देते हुए बताया कि संविधान बनने वक्त जब संविधान सभा की बैठक बुलाई गई तो अम्बेडकर को शामिल होने से रोकने के लिए देश के बड़े- बड़े नेताओं ने कम कोशिश नहीं की थी।

संविधान सभा में जाने के लगभग सभी दरवाजे बंद कर दिए गए थे, लेकिन पश्चिम बंगाल के मुसलमानों ने अपना समर्थन देकर बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर को संविधान सभा में भेजा।

उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने अगर समर्थन नहीं दिया होता तो संविधान सभा में बाबा साहेब अम्बेडकर नहीं पहुंच सकते थे। अगर नहीं पहुंचते तो संविधान में जो दलितों को हक़ मिला हुआ है, वह मुमकिन नहीं हो पाता।

राज रत्न अम्बेडकर ने देश के मुसलमानों से अपील की है कि आज फिर बाबा साहेब अम्बेडकर के परिवार को मुसलमानों की जरूरत है। संविधान को बचाने के लिए फिर हमें मुसलमानों के समर्थन की जरूरत है। आप सभी फिर हमारा सहयोग किजिये और संविधान को बचाने के लिए मदद किजिये।

Top Stories