दलितों पर क्या है चंद्रशेखर की पकड़? आखिर प्रियंका गांधी ने क्यों की अस्पताल में जाकर मुलाकात?

दलितों पर क्या है चंद्रशेखर की पकड़? आखिर प्रियंका गांधी ने क्यों की अस्पताल में जाकर मुलाकात?

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर से मेरठ के अस्पताल में मुलाकात की हैं। खबरों के मुताबिक, चंद्रशेखर से मिलने के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि ने इन्होंने जो संघर्ष किया वह काबिले तारीफ है।

इस संघर्ष को देखने के बाद ही मैं मिलने के लिए आई हूं।” उन्होंने बीजेपी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “यह सरकार इतनी अंहकारी बन गई है कि एक नौजवान को कुचलना चाहती है।

सरकार ने रोजगार तो दिया नहीं अब आवाज उठाने वालों को कुचलने का काम कर रही है।” खबरों के मुताबिक, दोनों नेता मेरठ में चंद्रशेखर से मुलाकात के लिए एक निजी अस्पताल पहुंचे हुए थे जहां उनका इलाज किया जा रहा है।

इस दौरान चंद्रेशखर के साथ मौजूद उनके राष्ट्रीय महासचिव कमल सिंह ने बताया कि प्रियंका गांधी निश्चित तौर पर वो एक सुलझी हुई राजनेता है। हम उनका सम्मान करते हैं। हमारी लड़ाई का किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं है लेकिन मोदी और योगी सरकार हमें कुचलना चाहती है।

भीम आर्मी के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी कुवंर देवेन्द्र सिंह ने प्रियंका गांधी से मुलाकात पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी का चंद्रशेखर से मिलने आना यह बताता है कि वो एक परिपक्व नेता है। उन्होंने चंद्रशेखर के प्रयासों को सराहा जिसके लिए भीम आर्मी उनकी आभारी है।

मेरठ के अस्पताल में अपने रिश्तेदार से मिलने पहुंचे मुजफ्फरनगर के वकील असद जमा ने बताया कि जैसे ही प्रियंका गांधी वहां पहुंचीं तो मरीजों के परिजनों में उनसे मिलने की होड़ मच गई।

उन्होंने बताया कि प्रियंका गांधी ने किसी को निराश नहीं किया और सभी से मुलाकात की। असद जमा के मुताबिक उन्होंने भी प्रियंका गांधी से बात की और प्रियंका गांधी ने बेहद सहजता के साथ उनसे उनका नाम पूछा।

इस मुलाकात से पहले चन्द्रशेखर ने कहा है कि वह लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगे। उन्होंने आगे कहा कि पहले तो अपने संगठन से कोई मजबूत उम्मीदवार उतारेंगे और अगर उम्मीदवार नहीं मिला तो वह स्वयं मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।

उन्होंने बुधवार को यहां जारी एक वीडियो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि कल (मंगलवार) देवबंद में उनकी पदयात्रा उन्हीं के इशारे पर रोकी गई थी। उन्होंने कहा, “हमारे पास पदयात्रा की अनुमति थी।

लेकिन प्रशासन और सरकार इस बात को लेकर झूठ फैला रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “15 मार्च को दिल्ली में बहुजन हुंकार रैली होगी। इसमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेंगे। चाहे जो इसे रोकने का प्रयास करे, अब यह रुकेगा नहीं।”

चंद्रशेखर ने कहा, “समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को अभी प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर अपना रुख साफ करना होगा। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह अपने बयान से लोगों में भ्रम पैदा कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि भीम आर्मी के समर्थक सोमवार को सहारनपुर से मुजफ्फरनगर के लिए रवाना हुए थे। बताया जा रहा है कि भीम आर्मी की रैली को 15 मार्च तक दिल्ली पहुंचना था। इसलिए भीम आर्मी के समर्थक हाथों में संगठन के नीले झंडे और तिरंगे लेकर जुलूस निकालते हुए जा रहे थे, तभी उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

पुलिस ने रोकते हुए कहा कि जुलूस से आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हो रहा था, जबकि भीम आर्मी के सदस्यों ने कहा कि उन्होंने प्रशासन से इसकी अनुमति मांगी थी। जिसके बाद चन्द्रशेखर को पुलिस ने देवबंद में आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में हिरासत में ले लिया गया था। बाद में उनकी तबीयत खराब होने पर मेरठ के अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

भीम आर्मी एक बहुजन संगठन है, जिसे भारत एकता मिशन भी कहा जाता है। ये दलित चिंतक सतीश कुमार के दिमाग की उपज है। इसे 2014 में चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ और विनय रतन आर्य ने हाशिए वाले वर्गों के विकास के लिए स्थापित किया गया।

चंद्रशेखर का जन्म सहारनपुर में चटमलपुर के पास धडकूलि गांव में हुआ था। जिले के एक स्थानीय कॉलेज से उन्होंने कानून की पढ़ाई की। वो पहली बार 2015 में विवादों में घिरे थे। उन्होंने अपने मूल स्थान पर एक बोर्ड लगाया था, जिसमें ‘धडकाली वेलकम यू द ग्रेट चमार्स’ लिखा था।

इस कदम ने गांव में दलितों और ठाकुर के बीच तनाव पैदा कर दिया था. चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया के जरिए काफी सुर्खियां बटोरी हैं। चंद्रशेखर ने फेसबुक और व्हाट्सअप के जरिए लोगों को भीम आर्मी से जोड़ने का काम किया।

भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने अपनी ताकत उस वक्त दिखायी, जब नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में दलितों ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

सहारनपुर में दलितों पर हुई हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन के बाद चंद्रशेखर ने कहा था कि यदि 37 निर्दोष दलित जमानत पर रिहा किये जाएं, तो वह आत्मसमर्पण कर देगा।

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