VIDEO: राफेल डील से लेकर CBI विवाद पर वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण का मोदी सरकार पर सबसे बड़ा हमला

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वकील प्रशांत भूषण ने कहा है कि सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा लड़ाकू विमान राफेल की खरीद में कथित गड़बड़ी की जांच शुरु करने वाले थे, लेकिन जांच शुरु होने से पहले ही मोदीसरकार ने वर्मा की जगह पहले से भ्रष्टाचार की जांच से घिरे अधिकारी एम नागेश्वर राव को जांच एजेंसी का प्रभारी निदेशक बना दिया।

भूषण ने वाम दलों की ओर से राफेल खरीद मामले में कथित गड़बड़ी पर बुधवार को आयोजित जनसुनवाई को संबोधित करते हुए सीबीआई में मौजूदा घटनाक्रम को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जमकर निशाना साधा।

सुप्रीम कोर्ट के वकील ने वर्मा के खिलाफ कार्रवाई को दी चनौती
भूषण ने कहा ‘‘वर्मा के खिलाफ की गयी कार्रवाई का एकमात्र मकसद राफेल घोटाले की जांच को रोकना है। क्योंकि चार अक्तूबर को मैंने पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण शौरी और यशवंत सिंहा के साथ राफेल घोटाले से जुड़े तथ्य वर्मा को सौंपे थे।

इन तथ्यों को गंभीरता से लेते हुये वर्मा आज जांच शुरु करने वाले थे, लेकिन इसके पहले ही मोदी सरकार ने उन्हें पद से हटा दिया।’’ उल्लेखनीय है कि भूषण ने वर्मा के खिलाफ की गई कार्रवाई को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है।

भूषण ने राफेल मामले को अब तक का सबसे बड़ा रक्षा खरीद घोटाला बताते हुए कहा ‘‘इसमें प्रधानमंत्री की सीधे तौर पर भागीदारी है और इसीलिये वर्मा की जगह उस अधिकारी को सीबीआई का प्रभारी निदेशक बनाया गया है जिस पर पहले से भ्रष्टाचार के मामलों में जांच चल रही है।’’

जनसुनवाई के दौरान माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने वर्मा सहित सीबीआई के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को देश की शीर्ष जांच एजेंसी में ‘सियासी तख्तापलट’ बताया। उन्होंने कहा कि राफेल मामले में कथित घोटाले की सच्चाई को उजागर होने से रोकने के लिये सरकार ने न सिर्फ देर रात जांच एजेंसी के शीर्ष अधिकारियों का तबादला कर दिया बल्कि सीबीआई मुख्यालय को सील भी कर दिया गया।

वरिष्ठ वकील और स्वराज अभियान के नेता प्रशांत भूषण ने केंद्र की मोदी सरकार पर राफेल सौदे में भ्रष्टाचार करने, नियम कानून को ताक पर रखने तथा देश की सुरक्षा के साथ समझौता करने का आरोप लगाया है।

श्री भूषण ने आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारतीय वायु सेना के लिए 126 विमान खरीदे जाने थे। इनमें से 108 मेक इन इंडिया के तहत भारत में बनने थे। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कायदे कानून को ताक पर रख कर खुद ही 36 विमानों का सौदा कर दिया।

मेक इंडिया खत्म कर दिया। प्रौद्योगिकी हस्तांततरण भी खत्म हो गया। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स को किनारे कर दिया और अनिल अम्बानी को ऑफसेट भागीदार बना कर उसे 21000 करोड़ रूपये का ठेका दिला दिया।

उन्होंने कहा कि इस सौदे में विमान के दाम 670 करोड़ रूपए ये बढ़ा कर 1660 करोड़ रूपए कर दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस सौदे में भ्रष्टाचार किया है।

वायु सेना जो वर्षों से एक बेहतर युद्धक विमान की मांग कर रही थी उसकी कमर तोड़ दी। देश की आत्मनिर्भरता खत्म कर दी और उसकी सुरक्षा के साथ समझौता कर लिया।

श्री भूषण ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो को शिकायत देकर इस सौदे में भ्रष्टाचार को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी और वह इस पर विचार कर भी रही थी।

इस सिलसिले में वह एजेंसी के निदेशक अलोक वर्मा से भी मिले जिस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं और सरकार ने काफी होहल्ला किया। उन्होंने दावा कि श्री वर्मा ने सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच भी शुरू कर दी थी।

ऐसे में सरकार ने रातों रात श्री वर्मा को पद से हटा दिया और ऐसे संदिग्ध व्यक्ति को कार्यवाहक निदेशक बना दिया जिस पर भ्रष्टाचार के अनेक आरोप हैं। इस नए अधिकारी ने रातों रात अनेक अधिकारियों के तबादले कर दिए।

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