इस वीडियो में जो वाकया बताया जा रहा है उससे मां का अह्सास होता है।
हुआ यूं कि इफ्तिखार ठाकुर बता रहे हैं कि जब एक बुजुर्ग शख्स को जमजम का पाक और मुबारक पानी ले जाते देखा तो उन्होंने उस जमजम की मुबारक पानी को उनके घर तक पहुंचाने के लिए कहा।
जब उन्होंने पहुंचा दिया तो बुजुर्ग शख्स ने उन्हें पांच रियाल निकालकर दिए। लेकिन इफ्तिखार ठाकुर ने लेने से मना कर दिया और बेटे जैसा होने का हवाला दिया।
इसके बाद उस बुजुर्ग शख्स ने अपने दामन को काबा शरीफ़ की तरफ़ दामन उठाकर उनके लिए दुआ की। दुआ के बाद जब वो चले वहां से तब उनको उस वक्त तक निहारते रहें जब तक कि वो मुड़कर ओझल नहीं हुए।
इफ्तिखार ठाकुर बताते हैं कि यह वाक्या उन्हें उनकी मां की याद दिला दी।
इफ्तिखार ठाकुर बताते हैं कि वो जब भी घर से निकलते, उनकी मां वैसे ही निहारती रहती जबतक के वो रास्तें में ओझल नहीं हो जाते। यह अह्सास दिलाता है कि मां की दुआ कितनी बड़ी होती है।
This post was last modified on January 20, 2021 1:25 pm