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मलेशिया में अपने पांव ज़माने में जुटे इस्लामिक धर्मगुरु जाकिर नाइक

पुतराजया मस्जिद में शुक्रवार की नमाज के खत्म होने के बाद जहां भीड़ बाहर निकलती हैं, वहीं कुछ लोग मस्जिद की पिछली पंक्ति में जमा होते हैं। यहां उनका ध्यान इस्लामिक धर्मगुरु जाकिर नाइक की ओर है। नाइक को मलेशिया की स्थायी नागरिकता दी गई है। जाकिर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और आतंक के मामले में एनआईए जांच कर रही है।

नाइक ने जुलाई 2016 में तब भारत छोड़ा था जब बांग्लादेश में मौजूद आतंकियों ने दावा किया था कि वे जाकिर के भाषणों से प्रेरित हो रहे हैं। एनआईए ने मुंबई स्थित अपने ब्रांच में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत 18 नवंबर, 2016 को जाकिर के खिलाफ केस दर्ज किया था।

हालांकि इन आरोपों को नाइक ने झूठा बताया था। यहां के उच्च सरकारी अधिकारी और स्थानीय मुस्लिम नेता उन्हें काफी तवज्जो देते हैं। स्थानीय सुरक्षा कंपनी से उनको निजी अंगरक्षक दिया गया है। मलेशिया के पीएम नजीब रजाक और उनके मंत्री भी इसी मस्जिद में इबादत के लिए आते हैं।

नाइक, उप प्रधानमंत्री अहमद जाहिद हामिदी के साथ भी दिखाई पड़ते हैं। नाइक की आजादी ज़ाहिद पर निर्भर है। अगर भारत सरकार नाइक को प्रत्यर्पित करने का अनुरोध करती है, तो उसे वापस देंगे, उन्होंने पिछले नवंबर में संसद को बताया था। नाइक मस्जिद के बाहर लोगों को गले लगाते हैं।

मलेशियाई सरकार द्वारा स्थायी निवासी (पीआर) स्थिति देकर भगोड़ा नाइक को आश्रय प्रदान कर रही है जिससे हिन्दू समूह नाराज है। उन पर ढाका में 2016 के आतंकवादी हमलों के बाद आरोप गया था कि उन्होंने उन युवाओं में से एक को प्रेरित किया था जिन्होंने हमलों को अंजाम दिया था।

22 वर्षीय रोहन इम्तियाज ने कथित तौर पर अमेरिका के 9/11 के हमलों से जुड़े सऊदी नागरिक ओसामा बिन लादेन की प्रशंसा करते नाइक के पुराने व्याख्यानों में से एक की एक वीडियो क्लिप साझा की थी। 51 वर्षीय जाकिर नाइक का जन्म मुंबई में 18 अक्टूबर 1965 को हुआ था। उसने एमबीबीएस किया है। नाइक एक मुस्लिम धर्मगुरु, राइटर और स्पीकर है। इसके अलावा वो इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन या आईआरएस का फाउंडर और अध्यक्ष हैं।

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