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‘संबित पात्रा को देखा तो बचपन का वो ‘मूर्ख मौलाना’ याद आ गया’

डेढ़ इश्किया जैसी मशहूर फिल्मों की कहानी लिख चुके दाराब फारूकी ने भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। जिसमें उन्होंने टीवी डिबेट के दौरान पैनल में बैठे अन्य हिंदू वक्ताओं को ‘सूडो हिंदू’ कह डाला था। डिबेट के दौरान पात्रा ने उन्हें नकली हिन्दू और हिन्दू बोलने में शर्म आने वाला करार दिया था।

रिपब्लिक चैनल की उस डिबेट में भाजपा प्रवक्ता ने सपा प्रवक्ता घनश्याम तिवारी को भी ‘मौलाना घनश्याम’ कहकर तंज कसा था। दा वायर की खबर के अनुसार संबित पात्रा के उन बयानों के पर दाराब कहते हैं कि टीवी पर पात्रा को देखकर बचपन के मूर्ख मौलाना याद आ गए।

इस दौरान उन्होंने एक किस्सा याद करते हुए बताया कि पात्रा की तरह एक मौलाना से बचपन में उनका वास्ता पड़ा है। दाराब फारूकी कहते हैं, ‘मुझे बचपन की एक कहानी याद आ रही है। वह होली का दिन था। जहां हम रहते वहां आधे बच्चे हिंदू और आधे मुस्लिम समुदाय से आते थे। हो सकता है हिंदू ज्यादा हों, लेकिन ऐसा कभी महसूस ही नहीं हुआ। हालांकि त्योहारों पर हिंदू कौन और मुसलमान कौन पता चल जाता था। अन्य दिनों में तो कंचे, गिल्ली डंडा, क्रिकेट खेलते हुए सभी का वक्त साथ बीतता था।’

फारूकी आगे कहते हैं कि होली का दिन था, तब मैं 8-10 साल का रहा होऊंगा। उस दिन पानी पर प्रतिबंध था और थोड़ी देर की होली के बाद टंकियां भी खाली हो गईं। किसी ने हमें बताया कि पास की मस्जिद की टंकियां पानी से भरी हैं। तब किसी तरह हिम्मत जुटाकर मस्जिद से पानी लाने की योजना बनाई गई। मस्जिद की टंकियां से पानी इतनी तेज आ रहा था कि दस सेकंड में काफी पानी मिल गया। मूर्ख मौलाना वाली बात याद कर फारूखी कहते हैं कि बाद में जब दोबारा पानी लेने के लिए मस्जिद में गए तो मौलाना ने पकड़ लिया।
हालांकि जब मौलाना को पता चला की मैं मुस्लिम हूं तो उन्होंने मुझसे कहा, ‘तू मुस्लिम नहीं है। मुस्लिम हो ही नहीं सकता। तुझे खुद मुस्लिम कहने में शर्म आनी चाहिए। तू बाल कटा कर चोटी रख ले। लेखक फारूकी कहते हैं कि पात्रा को टीवी पर देखकर फिर वो मूर्ख मौलाना याद आ गया। जिन्होंने तब फारूकी से कहा कि वह मुस्लिम नहीं हो सकते।

(साभार न्यूज़24)

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