भारत के बंटवारे और कश्मीर की अव्यवस्था के लिए कौन जिम्मेदार है? राम पुनियानी

भारत के बंटवारे और कश्मीर की अव्यवस्था के लिए कौन जिम्मेदार है?  राम पुनियानी

राजनैतिक ताकतें अपने एजेंडे को लागू करने के लिए इतिहास के साथ छेड़छाड़ करती हैं और वे अतीत की घटनाओं और उनके निहितार्थों के सम्बन्ध में सफ़ेद झूठ बोलने से भी नहीं हिचकिचातीं। जहाँ तक इतिहास का सवाल है, उस पर यह सिद्धांत पूरी तरह से लागू होता है कि ‘तथ्य पवित्र हैं, मत स्वतंत्र है’ अर्थात आप तथ्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकते परन्तु उनके बारे में कोई भी राय रखने के लिए स्वतंत्र है, परन्तु मोदी और उनके जैसे अन्यों के लिए ‘प्यार और जंग में सब जायज है।

अपनी व्यक्तिगत महत्वकांक्षाएं पूरी करने और अपने राजनैतिक एजेंडे को लागू करने के प्रयास में मोदी सभी सीमायें पार कर रहे हैं। सरदार पटेल का महिमामंडन करने के लिए वे जवाहरलाल नेहरु का कद छोटा करने का प्रयास कर रहे हैं और इन दोनों नेताओं को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी सिद्ध करने पर आमादा हैं। उनके इस प्रयास के दो लक्ष्य हैं, पहला, चूँकि मोदी परिवार ने स्वाधीनता आन्दोलन में भागीदारी नहीं की इसलिए वे पटेल को अपना बताकर इस कमी को पूरा करना चाहते हैं।

इस तथ्य के बावजूद कि पटेल का यह स्पष्ट मत था कि मोदी के वैचारिक पितामह (हिन्दू महासभा- आरएसएस), महात्मा गाँधी की हत्या के लिए ज़िम्मेदार थे। इन दोनों संगठनों (आरएसएस और हिन्दू महासभा) की गतिविधियों के चलते देश में ऐसा वातावरण बना जिसके कारण इतनी भयावह त्रासदी संभव हो सकी। आरएसएस की गतिविधियाँ, सरकार और राज्य के अस्तित्व के लिए खतरा हैं।

जहाँ तक देश के विभाजन का प्रश्न हैं, ऐसी अनेक पुस्तकें और लेख उपलब्ध हैं, जो हमें न केवल विभाजन की पृष्ठभूमि से परिचित करवाते हैं। यह सही है कि यह प्रक्रिया इतनी जटिल थी और इसके इतने विविध पहलू और कारण थे कि उनमें से किसी एक को चुनकर अपना मनमाना चित्र प्रस्तुत कर सकते हैं। जिन्ना के समर्थकों की दृष्टि में देश के विभाजन के लिए कांग्रेस ज़िम्मेदार थी। मोदी भी जिन्ना-समर्थकों की तरह कांग्रेस को ही कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

विभाजन के पीछे तीन मूल कारण थे इनमें पहला था अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीति। अंग्रेज़ यह जानते थे कि भारत के राजनैतिक नेतृत्व का समाजवाद की ओर झुकाव है और उन्हें डर था कि स्वाधीन भारत, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रूस के नेतृत्व वाले समाजवादी देशों के गठबंधन के साथ जुड़ सकता है।

अपने साम्राज्यवादी हितों की पूर्ति के लिए अंग्रेज़ चाहते थे कि दुनिया के इस इलाके में एक ऐसा देश हो जो उनका पिछलग्गू बना रहे और पाकिस्तान ने यह भूमिका बखूबी अदा की। अंग्रेजों के लिए अपना यह लक्ष्य पूरा करना इसलिए आसान हो गया क्योंकि सावरकर, जो कि मोदी की विचारधारा के मूल प्रतिपादक थे, ने द्विराष्ट्र सिद्धांत के स्थापना की। तीसरा कारण था जिन्ना की यह मान्यता कि चूँकि मुस्लिम एक अलग राष्ट्र हैं इसलिए उनका एक अलग देश होना चाहिए।

अपनी महत्वपूर्ण पुस्तक ‘गिल्टी मेन ऑफ़ इंडियास पार्टीशन’ में लोहिया लिखते हैं कि हिन्दू कट्टरवाद उन शक्तियों में शामिल था जो भारत के विभाजन का कारण बनीं। जो लोग आज चिल्ला-चिल्लाकर अखंड भारत की बात कर रहे हैं अर्थात आज का जनसंघ (भाजपा का पूर्व अवतार) और उसके पूर्ववर्तियों, जो हिन्दू धर्म की गैर-हिन्दू परंपरा के वाहक थे, ने भारत का विभाजन करने में अंग्रेजों और मुस्लिम लीग की मदद की।

उन्होंने कतई यह प्रयास नहीं किया कि हिन्दू और मुस्लिम नज़दीक आयें और एक देश में रहें। उन्होंने हिन्दुओं और मुसलमानों के परस्पर संबंधों को ख़राब करने के लिए हरसंभव प्रयास किये और दोनों समुदायों के बीच यही अनबन और मनमुटाव भारत के विभाजन की जड़ बनी।

समय के साथ जिन्ना ने भी अलग पाकिस्तान की अपनी मांग पर और अड़ियल रूख अपना लिया। नेहरु के यह कहने के बाद कि वे कैबिनेट मिशन योजना से बंधे हुए नहीं हैं, जिन्ना ने यह साफ़ कर दिया के वे अलग पाकिस्तान की अपनी मांग से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

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