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गाँधीजी को ‘चतुर बनियाँ’ कहने वाले अपने गुरू गोलवलकर के बारे में भी बोल दें कुछ: विनोद दुआ

 

वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ ने अपने कार्यक्रम जन गण मन की बात के 67 वें एपिसोड में नोटबंदी के गंभीर परिणाम पर से पर्दा हटाया है और अमित शाह के उस बयान पर तंज़ किया है, जिसमें उन्होंने महात्मा गाँधी को चतुर बनियाँ बताया था।

विनोद दुआ ने कहा कि जिन लोगों के जुबान बंद थे, मुंह में ताले लगे हुए थे, डरे हुए थे अब वह भी बोलने लगे हैं। चाहे वह संस्थान हों या लोग हों कि नोटबंदी से कुछ हासिल नहीं हुआ। यह एक ऐसा कदम था जो सोच समझ कर नहीं उठाया गया, बल्कि अब उसका नुकसान देखने में आ रहा है। भारत सरकार के मुताबिक जीडीपी हमारा वैसे ही कम हो गया है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि कुल कितना पैसा जमा हुआ गिनने में अभी 6 से 9 महीने और लग सकते हैं। हमारा सवाल यह है कि जब बैंकों में पैसा जमा कराया जाता है या लिया जाता है तो एक एक नोट बैंक गिन के लेता है, क्या नोटबंदी के बाद जितना पैसा बैंकों में जमा कराया गया था वह बिना गिने कराया गया था? क्या बैंकों ने रिजर्व बैंक को नहीं बताया होगा कि कितना पैसा उनके पास आया है।

उन्होंने आगे अमित शाह के बयान को लेकर कहा कि क्या वह अपने गुरु जी (गोवलकर) के लिए ऐसे जुबान का इस्तेमाल करेंगे जैसा उन्होंने गाँधी जी के लिए किया है।

 

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