आसनसोल हिंसा: पीड़ितों ने बयां किया दर्द,

आसनसोल हिंसा: पीड़ितों ने बयां किया दर्द,
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Kolkata: Devotees participate in a procession to celebrate 'Ram Navami Festival' in Kolkata on Wednesday. PTI Photo (PTI4_5_2017_000192A)

पश्चिम बंगाल के आसनसोल में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के बाद वहां के स्थानीय लोग अभी भी अपने घर लौटने से घबरा रहे हैं। इसमें हिंसा की आग में झुलसे दोनों ही सुमदाय के लोग शामिल हैं। पूछने पर चांदमारी की रेलवे कॉलोनी में स्थित अपने घर के बाहर खड़े अखिलानंद सिंह पड़ोसी के घर की तरफ इशारा करते हुए बताते हैं कि अराजक तत्वों ने उसे तोड़ दिया और लूटपात की। उन्होंने कहा कि उनका खुद का बेटा पुलिस हिरासत में है। जिसका कसूर अभी तक पता नहीं चल पाया है। दो साल पहले रेलवे में सुरक्षा गार्ड रहते रिटायर्ड हुए सिंह उन सैंकड़ों लोगों में से एक हैं जो हिंसा की आग, जहां रामनवमी के दौरान हुए संघर्ष में दो लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा, में झुलसे हैं। जिन लोगों को अपना घर छोड़कर जाना पड़ा उनमें अधिकतर लोग हिंदू समुदाय से आते हैं। इन लोगों के बीच घर वापसी को लेकर खासा डर पैदा हो गया है।

सिंह आगे कहते हैं, ‘रामनवमी की रैली के बाद सुबह करीब दस बजे कुछ युवा जिनके चेहरे ढके हुए थे, लाठी और रॉड्स लेकर आस-पड़ोस में घूम रहे थे। मैं अपने घर में था लेकिन दंगाईयों की गोलीबारी की आवाज को सुन सकता था। मैंने रो रहे एक साल के अपने पोते का मुंह दबाकर जान बचाई। उन्होंने हमारे पड़ोसियों के घरों के दरवाजे तोड़ दिए और सबकुछ लूट लिया। दंगाईयों ने कुछ घरों को आग के हवाले भी कर दिया।’ अखिलानंद सिंह बताते हैं कि, ‘मैंने मदद के लिए 100 नंबर पर पुलिस को फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद मैंने अपने दोस्त को फोन किया, जो हमारी मदद के लिए कुछ हिंदू युवाओं के साथ आए। रविवार (25 मार्च, 2018) को दोपहर बाद मैं अपनी पत्नी, बेटा, बहू और पोते के लेकर करीब छह किमी दूर बर्नपुर दोस्त के घर पहुंचा। बाद में मैं अपना घर देखने के लिए बेटे के साथ यहां पहुंचा तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।’ सिंह ने यह बात अपने घर के बाहर कहीं, जो तबाह घरों और जले वाहनों के बीच में था।

हिंसा के बाद वहीं रह गए मुस्लिमों के बीच भी डर बना हुआ है, जिनके बीच घर से बाहर निकलने को लेकर भय का माहौल है। ड्राइव कर करीब दस मिनट की दूरी पर रह रहीं सुमित्रा देवी (50) और उनके परिवार का कहना है कि इस हिंसा में उनका सबकुछ चला गया। भीड़ ने उनके घर को आग के हवाले कर दिया, जिसमें पैसों से लेकर जूलरी और जरूरी कागज जैसे राशन कार्ड था। वहीं सड़क से नीचे 15 मिनट की दूरी पर नूरानी मस्जिद के बाहर नदीम रेजा (16) खड़ी हुईं  मिलीं। उनके चेहरे पर एक मायूसी छाई है। रेजा अपनी परीक्षाओं को लेकर काफी चिंतित हैं। रेजा के साथ यहां करीब 200 अन्य छात्र परीक्षा में नहीं बैठ सके। घर से बाहर निकले के सवाल पर वह भी काफी डरी हुईं हैं। बता दें कि आसनसोल हिंसा के बाद शुक्रवार को हिंसा की कोई नई वारदात सामने नहीं आई है। बताया जाता है कि इस इलाके में अधिकतकर लोगों की आबादी हिंदी भाषी है, जो बिहार और यूपी से आकर यहां बसे हैं।

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