अगर वाकई ये सरकार जनता की होती तो नेतन्याहू को आमंत्रित नहीं करती- मौलाना अरशद मदनी

अगर वाकई ये सरकार जनता की होती तो नेतन्याहू को आमंत्रित नहीं करती- मौलाना अरशद मदनी
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जमाअत उलेमा हिन्द के अध्यक्ष हजरत मौलाना अरशद मदनी पिछले दिनों मुंबई में थे। बीमारी और कमजोरी के बावजूद उनहोंने नवी मुम्बई के एसटी डिपो के मैदान में (जहां लोगों की खचाखच भीड़ थी) कहा कि अगर यह वाकई जनता की सरकार होती और हर एक के जज्बात का ख्याल रखती तो इस्राइली प्रधान मंत्री नेतान्याहू को भारत दौड़े के लिए आमंत्रित नहीं करता।

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मौलाना अरशद मदनी से पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन शांति के दायरे में हमेशा से लोकतांत्रिक हक़ में रहा है। रही बात नेतान्याहू की तो यह मोदी सरकार की मुस्लिम विरोधी पॉलिसी है। मोदी सरकार इस पॉलिसी के तहत नेतान्याहू को यहां बुला रहे हैं और इस्राइल के साथ रिश्तों को मजबूत बना रहे हैं।

उनहोंने कहा कि अगर यह वाकई जनता की सरकार होती और यह हर वर्ग के लोगों के जज्बात का ख्याल करती तो यह इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू को भारत दौड़े के लिए आमंत्रित नहीं करती। इसमें न तो सरकार के लिए बेहतरी है और न ही देश के लिए।

उनहोंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह दावा है कि हम दोनों (मोदी-नेतान्याहू) भाई भाई हैं। उनहोंने कहा कि मोदी सरकार के इस नजरिये से एक सवाल खुद ब खुद उठ रहा है कि उसका यह नजरिया कहीं मुस्लिमों से दुश्मनी तो नही है। उनहोंने कहा कि कभी भी सत्ता प्रमुख को ऐसे जुमले से परहेज करना चाहिए।

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