Monday , July 16 2018

म्यांमार में एक महीने में 6700 रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या हुई- विश्व चिकित्सा संस्थान

Rohingye people, a Muslim population, living in Rakhine State on the northwest coast of Burma have been restricted to their villages and placed in Internally Displaced Peoples (IDP) camps by the Burmese government. They have been the victims of persecution and communal violence by numbers of the Buddhist majority in Rakhine. International NGO's such as MSF have been expelled by the government, leading to a soaring crisis in health care. Brick kilns operated by Rohingya IDP's. Workers are IDP's. Adults are paid 2,000 kyat per day for about 10m hours of work. Children are paid 1,000 kyat per day. Children in photos are from age 6 to 8 and the oldest is 14. Thek Kay Pyin, 7, an IDP. His father is So Zokorice (small man in white tank top). He was falsely accused of murder and spent 1and 1/2 years in Sittwe Jail, beaten continuously for 8 months before being released without charges against him. Funeral of Ziada Begum, 30, who died of stomach diseasee. Left behind 5 children with no husband. Sham Shi Dar Begum, 18. TB and AIDS. Father died from AIDS. MOther Noor Johan, 50. Has seven daughters, all living in two small rooms in camp. Photograph by James Nachtwey.

लंदन। म्यांमार में मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर अत्याचार दुनिया में स्पष्ट रूप से उजागर हो गया है। पिछले महीने एम्नेस्टी इंटरनेशनल ने रखाइन राज्य में मुसलमानों, विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं को किस तरह से यातनायें दी गईं। उनके साथ साथ शारीरिक शोषण की गई, यह सभी रिपोर्ट्स पेश करके एमनेस्टी ने म्यांमार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अनुरोध किया था।

Facebook पे हमारे पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करिये

अब विश्व चिकित्सा सहायता संगठन ‘डॉक्टरज विदआउट बोडर्ज़’ का कहना है कि म्यांमार में अगस्त के महीने में शुरू होने वाले हिंसा के घटनाओं में एक महीने के दौरान कम से कम 6700 रोहिंग्या लोगों की हत्या की। बांग्लादेश में शरणार्थीयों से किए गये सर्वेक्षण के मुताबिक यह संख्या म्यांमार की ओर से पेश की 400 की संख्या से काफी अधिक है। ‘डॉक्टरज विदआउट बोडर्ज़’ का कहना है कि यह बड़े पैमाने पर फैलने वाले हिंसा की एक स्पष्ट निशानी है।

म्यांमार की फ़ौज हिंसा की घटनाओं का आरोप आतंकवादियों पर आयद करती है और किसी भी गलत काम में शामिल होने के आरोप को सिरे से ख़ारिज करती है। डॉक्टर्स विदआउट बोर्डर्स का कहना है कि 6 लाख 47 हज़ार रोहिंग्या अगस्त से बंगलादेश में आए हैं। मेडिकल संगठन के सर्वे के मुताबिक 25 अगस्त से 24 सितंबर के बीच 9 हजार रोहिंग्या म्यांमार में मै गये।

TOPPOPULARRECENT