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हमने सेना के इशारे पर रोहिंग्या मुस्लिमों को मारा, खुद गड्ढे खोदकर दफ़नाया भी- बौद्ध समुदाय

संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार में दस रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या और बाद में एक ही कब्र में दफना देने वाली घटना को चिंताजनक बताया है जो पिछले साल दो सितंबर को म्यांमार के गांव में हुई। राज्य में हिंसा की पूरी जांच के की तत्काल आवश्यकता है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता फरहान हक ने पिछले सप्ताह संवाददाताओं से कहा कि इस वारदात को अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रायटर्स ने कवर किया था।

एजेंसी के मुताबिक पहली बाहर इस रिपोर्ट में हत्या में शामिल बौद्धों और फौज के जवानों से बातचीत की गई है। सभी ने रोहिंग्या के खिलाफ हत्या में शामिल होने के साथ खुद गड्ढे खोदकर दफनाने तक की प्रक्रिया में हाथ होने की बात स्वीकार की है। हम इस नवीनतम रिपोर्ट से अवगत हैं, जिनके विवरण बहुत खतरनाक हैं।

बौद्ध समुदाय के एक 55 वर्षीय रिटायर्ड सैनिक सोई चय ने रायटर्स से कहा, ‘एक कब्र में 10 रोहिंग्या को दफनाया गया। उन्होंने हत्याएं होती देखीं और गड्ढे खोदने में मदद की। सैनिकों ने प्रत्येक व्यक्ति को दो से तीन बार गोली मारी। यहां तक कि कई ऐसे रोहिंग्या को भी दफनाया जा रहा था जो कि आवाज कर रहे थे। जबकि बाकी मर चुके थे।’

इस रिटायर्ड सैनिक के बयान से समझा जा सकता है कि म्यांमार में रोहिंग्या पर किस कदर जुल्मोसितम हुआ। म्यामांर के रखाइऩ स्टेट के तटीय गांवों में हुई हत्याओं ने बड़े पैमाने पर हुई सांप्रदायिक हिंसा की ओर इशारा किया। अमेरिकी राजदूत हेली ने सुरक्षा परिषद को बताया, “बर्मा सरकार की शक्तिशाली ताकतें राखीन राज्य में जातीय सफाई से वंचित हैं।

8 फरवरी को जारी म्यांमार में रॉयटर्स के नरसंहार में हत्याओं के तीन फोटो शामिल हैं और साथ ही, बौद्ध ग्रामीणों द्वारा दिए गए साक्ष्य, जिन्होंने म्यांमार सेना के आदेश पर रोहिंग्या के शवों को दफनाने और मुस्लिमों को मारा। अमेरिका के विदेश विभाग ने म्यांमार के राखीन राज्य के दक्षिण में इनडिन गांव में नरसंहार की जांच करते हुए गिरफ्तार किए गए दो पत्रकारों की रिहाई के लिए भी कहा है।

रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक उस दिन रखाइन स्टेट के गांव में जिन दस रोहिंग्या को फौज ने पकड़ा था, उनमें से कम से कम दो को काट दिया गया था और बाकियों को फोर्स ने गोली मार कर मौत के नींद सुला दिया। अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता हीथर नॉर्ट ने कहा, “जैसा कि अन्य सामूहिक कब्र की पिछली रिपोर्टों में यह रिपोर्ट बर्मा [म्यांमार] अधिकारियों के लिए एक निरंतर, विश्वसनीय जांच के लिए जारी और तत्काल आवश्यकता को उजागर करती है।

रॉयटर्स के संवाददाता वाई लोन और क्यू सो ओ ओ को गोपनीय दस्तावेजों को प्राप्त करने के लिए 12 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था और उन पर देश के आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। उनकी रिहाई के लिए बढ़ते अंतरराष्ट्रीय कॉल्स के बावजूद न्यायाधीशों ने 14 फरवरी को सुनवाई तक पत्रकारों को जमानत देने से इनकार कर दिया था।

सेना ने 10 जनवरी को एक बयान जारी किया जिसमें रिपोर्टर के निष्कर्षों के भाग की पुष्टि हुई। सेना ने स्वीकार किया कि 10 रोहिंग्या पुरुषों का नरसंहार किया गया और बौद्ध ग्रामीणों ने तलवारों के साथ कुछ लोगों पर हमला किया और सैनिकों ने अन्य लोगों को गोली मार दी।

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