जानिए, क्यों सऊदी अरब में नहीं है कोई भी नदी?

जानिए, क्यों सऊदी अरब में नहीं है कोई भी नदी?
Click for full image

क्या आप जानते हैं कि सऊदी अरब में कोई नदी नहीं है? ठीक है अगर आप इसे गूगल पर खोजते हैं तो आपको दुनिया में 17 ऐसे देश मिल जायेंगे जहां एक भी नदी नहीं है और इनमें सऊदी अरब सबसे ऊपर होगा। यह एकदम सही तथ्य है जिसे किसी भी समर्थन की आवश्यकता नहीं है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अल्लाह ने सऊदी अरब में किसी भी नदी को क्यों नहीं रखा है?

इसके पीछे एक गहरा तर्क है और इसे इस लेख के अंत तक साबित कर दूंगा। विवरण में जाने से पहले समझने की कोशिश करो कि नदी के किनारे क्या होता है? मनुष्यों का इतिहास लगभग 10,000 वर्ष पुराना है। प्राचीनकाल में लोग स्वच्छ और पीने योग्य पानी के आसपास रहते थे। यह भी एक सच्चाई है कि नदियों के पानी की तुलना में कोई पानी क्लीनर नहीं है।

यही कारण है कि दुनिया के सभी पुराने शहर नदियों के किनारे पर हैं जिनमें अलेक्जेंड्रिया, एम्स्टर्डम, बगदाद, लंदन, पेरिस, टोक्यो, हांगकांग ये सभी नदियों के किनारे पर स्थित हैं। जब लोग पानी के नजदीक एक जगह पर रहना शुरू करते हैं, तो आस-पास के क्षेत्रों के कई अन्य लोग भी उन शहरों में पलायन करते हैं। उनकी संस्कृति, भाषा और जीवनशैली भी प्रवासियों से प्रभावित हैं। समय बीतने के साथ प्राथमिक निवासियों की शुद्ध संस्कृति अप्रचलित हो जाती है और एक नई संस्कृति और भाषा अपनी जगह लेती है जो एक मिश्रित संस्कृति है।

अब मूल प्रश्न पर वापस आते हैं कि सऊदी अरब में कोई नदी क्यों नहीं है? यह कहानी 5,500 साल पहले शुरू हुई जब हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को अपनी पत्नी हजरत हाज़रा को छोड़ने को कहा गया।

अल्लाह तआला के हुक्म से हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी बीवी हज़रत हाजरा और बेटे हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम को मक्का मुकर्रमा के चटियल मैदान में बैतुल्लाह के क़रीब छोड़ दिया जैसा कि फ़रमाने इलाही है: “ऐ हमारे परवरदिगार.! मैंने अपनी कुछ औलाद को आपके हुरमत वाले घर के पास एक ऐसी वादी में ला बसाया है जिसमें कोई खेती नहीं होती।

हमारे परवरदिगार.! (ये मैंने इसलिए किया) ताकि ये नमाज़ क़ायम करें, लिहाज़ा लोगों के दिलों में इनके लिए कशिश पैदा कर दीजिए और इनको फलों का रिज़्क अता फ़रमाइये ताकि वो शुक्रगुज़ार बनें।

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की दुआ ऐसी कुबूल हुई कि दुनिया भर के मुसलमानों के दिल मक्का मुकर्रमा की तरफ खिंचे चले जाते हैं, चुनांचे हर मुसलमान की ये ख़्वाहिश होती है कि वो कम से कम एक मर्तबा अल्लाह तआला के घर की ज़रूर ज़ियारत करे और फलों की इफ़रात का ये आलम है कि दुनिया भर के फल बड़ी तादाद में वहाँ मौजूद हैं।

जब खाने पीने के लिए कुछ न रहा तो हज़रत हाजरा बेचैन होकर क़रीब की सफा और मरवा पहाड़ियों पर दौड़ीं। चुनांचे पानी का चश्मा ज़मज़म जारी हुआ। कुछ मुद्दत बाद एक क़बीला बनू जुरहुम का उधर से गुज़र हुआ। पानी का चश्मा देख कर उन्होंने हज़रत हाजरा से क़याम की इजाज़त चाही, हज़रत हाजरा ने वहाँ क़याम करने की इजाज़त दे दी।

Top Stories