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राज्यसभा में गरजे येचुरी ने कहा, गौरक्षकों पर लगे पूरी तरह प्रतिबंध

नई दिल्ली: मार्क्सेवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने देश में भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या (लिंचिंग) की बढ़ती घटनाओं को लेकर नरेंद्र मोदी की सरकार पर हमला किया और गोरक्षक समूहों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की. गोरक्षा के नाम पर लिंचिंग को लेकर राज्यसभा में एक चर्चा में हिस्सा लेते हुए येचुरी ने कहा, “आज जब मैं यहां बोल रहा हूं, तो मेरा सिर शर्म से झुका हुआ है.
हमारा गणतंत्र कहां पहुंच गया है?” उन्होंने कहा, “70 साल पहले यह कहने में हमारा सीना गर्व से फूल जाता था कि पहले ही दिन से हमने धर्म, जाति, लिंग को दरकिनार करते हुए सबको मत देने का अधिकार प्रदान किया, जैसा किसी भी पश्चिमी लोकतंत्र में नहीं हुआ था.” यह उल्लेख करते हुए कि उस वक्त पहचान का आधार समानता थी, येचुरी ने कहा, “आज उसी समानता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है और लिंचिंग की इन घटनाओं से उसे बुरी तरह से रौंदा जा रहा है.”
उन्होंने इन दिनों देश में असहिष्णुता के स्तर को लेकर सवाल उठाए. येचुरी ने कहा, “आपके यहां ऐसे लोग हैं, जो आज हिंदू और गैर हिंदू की पहचान के लिए यह सवाल उठाते हैं कि कौन बीफ खाता है और कौन नहीं खाता है.” उन्होंने कहा कि तमाम तरह की निजी सेनाओं को खुला आजाद छोड़ दिया गया है.
येचुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि यह कानून व्यवस्था का मामला है जो राज्य के दायरे में आता है. जबकि, कानून को हाथ में लेने वाली इन निजी सेनाओं को केंद्र के आदेश के तहत प्रतिबंधित करने की जरूरत है. इन्हें राज्य सरकारें प्रतिबंधित नहीं कर सकती हैं. ऐसा कर ही भीड़ पर काबू पाया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं इसलिए बढ़ी हैं क्योंकि एक खास तरह की विचारधारा काम कर रही है. कट्टर समूहों को आड़े हाथ लेते हुए येचुरी ने कहा कि आज ऐसा क्यों है कि ‘भारत माता की जय’ कहने वाला ही देशभक्त है, मानो ‘जय हिंद’ राष्ट्र-विरोधी हो.
उन्होंने कहा, “भगत सिंह ने ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा दिया था, क्या यह राष्ट्र-विरोधी था.” तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि विपक्ष सत्तारूढ़ दल के ‘राजनीतिक आतंकवाद’ के समक्ष नहीं झुकेगा.

 

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