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PM मोदी को वापस लेना पड़ा अपना फैसला, अमित शाह की मर्ज़ी से योगी आदित्यनाथ CM बने

अमित शाह नरेंद्र मोदी का भरोसा हैं। मोदी ने ही उनकी ताजपोशी करवाई। दोनों ने मिलकर बुज़ुर्ग नेताओं को ठिकाने लगाया।

पर अमित शाह कई मामलों में मोदी से कहीं ज़्यादा ताक़तवर हैं। उलटे सुनते हैं मोदी अब उनसे सलाह करते हैं, उनकी बात मानते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार कूमी कपूर – जिनके भाजपा में जानकारी के पुख़्ता स्रोत हैं – ने इंडियन एक्सप्रेस के अपने स्तम्भ में आदित्यनाथ योगी के मुख्यमंत्री बनने की अंदरूनी कहानी बताई है। उनके मुताबिक़ न मोदी की चली, न संघ की। अमित शाह का सुझाव माना गया।

इतना ही नहीं, कूमी के अनुसार, मोदी तो अपने कार्यकुशल मंत्री मनोज सिन्हा को उत्तरप्रदेश का ज़िम्मा सौंपना चाहते थे। उन्होंने सिन्हा को कह तक दिया था। सिन्हा तुरंत बनारस गए और दो बड़े प्राचीन मंदिरों में सर भी नवा आए।

लेकिन तभी अमित शाह ने मोदी को कहा कि सिन्हा के ख़िलाफ़ पार्टी में सुगबुगाहट है। एक धड़ा राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री बनने के हक़ में है। शाह ने बीच का रास्ता योगी में सुझाया। उन्होंने मोदी को संतुष्ट कर दिया कि योगी ही कड़े फ़ैसले करने में सक्षम होंगे और 2019 का चुनाव भी वही जितवा सकते हैं।

इस तरह मोदी का अपना फ़ैसला पलट गया। उनके नाम जीता गया चुनाव सहसा योगी की झोली में चला गया। मोदी के सामने ‘हर हर मोदी’ की जगह ‘हर हर योगी घर घर योगी’ के नारे लगे। कहते हैं योगी के समर्थक उन्हें भावी प्रधानमंत्री तक बताने लगे हैं।

जो हो, मेरा मानना यह है कि चुनाव के दौरान ही शाह और योगी में यह समझ बन गई होगी। इसीके चलते उग्र योगी और उनके समर्थकों के बाग़ी तेवर ठंडे पड़े। योगी स्टार-प्रचारक वाला विमान लेकर ज़ोर-शोर से अपूर्व भाग-दौड़ में जुट गए। सही मौक़ा आने पर शाह ने उनका नाम सही जगह सही ढंग से सामने कर दिया।

ख़याल करें, ये वही योगी थे जिनके उग्र बयानों पर, गिरिराज सिंह के साथ, पार्टी ने एक साल पहले चुपचाप बंदिश लगा दी थी। तब से दोनों नेताओं ने चुप्पी साध रखी थी। पर योगी आहत थे। अब सब ख़ुश हैं।

( ये लेख ओम थानवी की फेसबुक वॉल से लिया गया है, सियासत हिंदी ने इसे अपनी सोशल वाणी में जगह दी है।)

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