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योगी आदित्यनाथ के खिलाफ केस चलाने की मांग को लेकर HC में याचिका, सुनवाई 27 जुलाई को

इलाहाबाद – गोरखपुर में 2007 में दंगे में उस समय के सांसद तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में 27 जुलाई को सुनवाई होगी। इस मामले में राज्य सरकार ने अपना जवाबी हलफनामा दाखिल किया है।

राज्य सरकार के जवाबी हलफनामा दायर करने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याची को जवाब दाखिल करने का तीन हफ्ते का समय दिया है। न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी व न्यायमूर्ति केपी सिंह ने शुक्रवार को यह आदेश दिया है। याची ने इस घटना की सीबीआइ जांच की मांग की है, जबकि प्रदेश सरकार ने अभियोजन चलाने से इनकार किया है।

गोरखपुर दंगे की सीबीआई जांच कराने की मांग की याचिका पर तलब यूपी के मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने हलफनामा दाखिल किया है। इस मामले में सचिव ने अभियोजन चलाने से इंकार किया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदित्यनाथ के खिलाफ 2007 में हिंसा फैलाने के आरोप में जांच के लिए 153 ए के तहत सरकार द्वारा अनुमति दिए जाने पर सवाल उठए हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है और पूछा है कि योगी और अन्य आरोपियों के खिलाफ सीबीसीआडी जांच के लिए 153 ए के तहत सरकार ने अब तक जांच की अनुमति क्यों नहीं दी?

27 जनवरी 2007 की रात गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर विधायक राधामोहन दास अग्रवाल और गोरखपुर की मेयर अंजू चौधरी की मौजूदगी में कथित तौर पर हिंसा फैलाने वाला भाषण दिया था। इसके बाद पर विवादस्पद बयान देने का आरोप है।

इलाहबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को समन जारी करते हुए गोरखपुर दंगों से जुड़े सभी दस्तावेज लाने के निर्देश दिए थे। इन दंगों में तत्कालीन स्थानीय सांसद और मौजूदा मुख्य्मंत्री योगी आदित्यनाथ को आरोपी ठहराया गया था।

राज्य सरकार ने भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए के तहत योगी सहित उन सभी लोगों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी थी जिन्हें उस एफआईआर में नामजद किया गया था। ऐसे लोगों में गोरखपुर की तत्कालीन मेयर मंजू चौधरी और स्थानीय भाजपा विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल शामिल थे।

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