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उपचुनाव हारने पर पार्टी नेताओं के निशाने पर आये योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश लोकसभा की दो सीटों के उपचुनाव में भाजपा को करारी हाल झेलनी पड़ी जिससे पार्टी के अंदर नेतृत्व पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। भाजपा सांसदों ने काम करने के तरीके पर हार का ठीकरा फोड़ा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जहां हार के पीछे अति आत्मविश्वास, विपक्ष की रणनीति समझने में चूक को जिम्मेदार बताया है, वहीं सांसदो ने काम करने की शैली बदलने की मांग की है।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में भाजपा के इलाहाबाद सांसद श्याम चरण गुप्ता ने कहा कि पार्टी को सोच में बदलाव लाने की जरूरत है। काम करने के तरीके, सरकार से लेकर जनता तक पकड़ बनाने के तरीके की समीक्षा होनी चाहिए। जाहिर है कि कुछ न कुछ समस्या जरूर है, इसी वजह से दोनों सीटें हम हार गए।

गुप्ता ने कहा कि विधानसभा चुनाव जीतने के लिए पार्टी ने कड़ी मेहनत की थी लेकिन बाद में ऐसे लोगों को पार्टी में शामिल करने की होड़ मची, जिनका पार्टी के सिद्धांतों से कोई लेना-देना नहीं था। नरेश अग्रवाल ही नहीं विधानसभा चुनाव से पहले भी तमाम ऐसे नेताओं को भाजपा में लिया गया।

कौशांबी के सांसद और भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद कुमार सोनकर ने हार के पीछे स्थानीय नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इन सीटों के उपचुनाव के दौरान स्थानीय नेता दलितों तक पहुंचे ही नहीं, जिसका खामियाजा भुगतना पड़ा। सोनकर ने कहा कि दलितों के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमाम योजनाएं चलाईं, मगर भाजपा के नेता इसका चुनाव में लाभ उठाने में नाकाम रहे।

कुशीनगर सांसद राजेश पांडेय को उम्मीद है कि पार्टी हार के कारणों की समीक्षा कर सुधार पर फोकस करेगी। पांडेय ने यह स्वीकार किया कि उपचुनाव के नतीजे पार्टी के लिए चिंता की बात हैं। एक वरिष्ठ सांसद ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर कहा कि भाजपा ने उपचुनाव में गलत प्रत्याशी उतारे, बिना सीट पर जातीय समीकरण देखे।

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