Thursday , April 26 2018

तो क्या मुख्यमंत्री के पद से योगी आदित्यनाथ को हटा देगी भाजपा? नहीं है सब ‘ऑल इज वेल’!

उत्तर प्रदेश में लोकसभा की दो सीटों पर हुए उपचुनावों में भाजपा की हार और चार दलित सांसदों की ओर से राज्य नेतृत्व के प्रति असंतोष जाहिर किए जाने की घटना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंभीरता से लिया है। समझा जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य के ताजा हालात को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपनी चिंता जाहिर की है। बता दें कि आदित्यनाथ शनिवार को दिल्ली आए थे और इस दौरान उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक शाह ने भी कुछ मामलों में राज्य नेतृत्व की नाकामी की रिपोर्टों पर अपनी चिंता जाहिर की।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अमित शाह जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 11 अप्रैल को यूपी का दौरा करेंगे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आएसएस) के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के यूपी दौरे के बाद योगी आदित्यनाथ दिल्ली आए थे। आरएसएस के कृष्ण गोपाल एवं दत्तात्रेय हसबोले यूपी की अपनी तीन दिन की यात्रा के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं,आरएसएस नेताओं, पार्टी पदाधिकारियों, मंत्रियों एवं दो उप मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत की और उनसे ग्राउंड रिपोर्ट हासिल की। समझा जाता है कि आरएसएस के इन दोनों पदाधिकारियों ने राज्य के ताजा हालात की जानकारी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को दी जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और शाह ने आदित्यनाथ से स्पष्टीकरण की मांग की।

हालांकि, पीएम मोदी और अमित शाह से योगी की मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है लेकिन भाजपा के लोगों का मानना है कि इस मुलाकात का असर बहुत जल्द देखने को मिलेगा और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार और संगठन में यदि बड़ा बदलाव होता है तो उस पर किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए। आरएसएस ने पहले ही उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के वोटों की एकजुटता एवं भाजपा के खिलाफ दलित-मुस्लिमों के ध्रुवीकरण पर पार्टी शीर्ष नेतृत्व को सावधान किया है। भाजपा के लोगों का कहना है कि इन सब सारी चीजों से परेशान पीएम मोदी ने कथित रूप से योगी आदित्यनाथ को दिल्ली तलब किया और उनसे जल्द से जल्द इन सभी मामलों का हल निकालने के निर्देश दिए।

उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर की घटनाओं को लेकर विपक्ष पहले ही यूपी सरकार पर सवाल उठा चुका है। इस बीच राज्य के दलित समुदाय से आने वाले चार सांसद सावित्री बाई फुले, छोटे लाल, यशवंत सिंह और अशोक दोहरे दलित समुदाय पर होने वाले अत्याचारों को लेकर राज्य एवं केंद्र नेतृत्व के साथ अपनी नाराजगी और चिंता जाहिर कर चुके हैं। गोरखपुर में भाजपा की परंपरागत सीट हारने पर योगी आदित्यनाथ को झटका लगा था, अब इस घटना के एक महीने बाद वह फिर से मुश्किलों में घिरते दिख रहे हैं। पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि संगठन और सरकार में बढ़ते तनाव को देखते हुए आने वाले दिनों में सरकार एवं सांगठनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं।

 

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