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क्या योगी अपने खिलाफ लगे मामलों को वापस लेने के फैसले पर खुद हस्ताक्षर करेंगे?- अखिलेश यादव

लखनऊ। योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ला, भाजपा विधायक शीतल पांडेय समेत 10 लोगों के खिलाफ 27 मई 1995 को गोरखपुर के पीपीगंज पुलिस स्टेशन में निषेधाज्ञा भंग कर एक जनसभा करने का मामला दर्ज किया गया था।

इस बीच राज्य की भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुये समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आश्चर्य व्यक्त करते हुये कहा कि क्या मुख्यमंत्री स्वयं अपने खिलाफ लगे मामलों को वापस लेने के फैसले पर खुद हस्ताक्षर करेंगे।

सरकार ने योगी के खिलाफ मामला हटाने का आदेश पिछले सप्ताह दिया था। प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश दंड विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) (संशोधन) विधेयक, 2017 (उत्तर प्रदेश क्रिमिनल ला :कम्पोजिशन आफ अफेन्सेज एंड एबेटमेंट आफ ट्रायल) को विधानसभा के हाल ही में समाप्त हुये शीतकालीन सत्र में पेश किया था। इस विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत करने के एक दिन पहले यह आदेश दिया गया था।

विधानसभा में विधेयक पेश करने से पहले मुख्यमंत्री जिनके पास गृह मंत्री का पदभार भी है, ने सदन में कहा था कि पूरे प्रदेश में राजनीति से प्रेरित धरना प्रदर्शन के 20 हजार मुकदमे दर्ज है। इसमें 31 दिसम्बर 2015 तक दर्ज किये गये मुकदमें शामिल हैं।

गोरखपुर के पीपीगंज पुलिस स्टेशन के रिकार्ड के मुताबिक योगी तथा अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (किसी लोकसेवक द्वारा वैध रूप से जारी किसी आदेश की अवज्ञा करने वाले कार्य को दंडनीय अपराध घोषित करती है) के तहत 27 मई 1995 को निषेधाज्ञा भंग करके एक जनसभा करने का मामला दर्ज किया गया था।

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