Wednesday , July 18 2018

फिलिस्तीनियों के साथ शांति की कोशिशें नाकाम,अब जिहाद का वक्त: अल कायदा

अल कायदा आतंकी मान-अल-जवाहिरी अमेरिका के खिलाफ मुस्लिमों को हथियार उठाने को कहा है। ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद, जवाहिरी ही अल कायदा का सबसे बड़ा नेता है। उसने कहा है कि अमेरिका का येरुशलम में अपना दूतावास ले जाना इस बात का सबूत है कि फिलिस्तीन के साथ बातचीत और शांति की कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं। अब मुस्लिमों को अमेरिका के खिलाफ जिहाद करना चाहिए। बता दें कि पिछले साल दिसंबर में अमेरिका ने येरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दी थी। अब वह अपना दूतावास भी तेल अवीव से येरुशलम शिफ्ट कर रहा है।

जवाहिरी ने ‘मुस्लिमों की भी धरती है तेल अवीव’ के नाम से 5 मिनट का वीडियो जारी किया है, जिसमें उसने मुस्लिमों से अपील की है। मिस्री मूल का जवाहिरी डॉक्टर है। 2011 में लादेन के मारे जाने के बाद वही अल कायदा का सबसे बड़ा नेता है।
– जवाहिरी के मुताबिक, “डोनाल्ड ट्रम्प की सोच एकदम साफ है। अब आधुनिक जिहाद का वक्त है, जिसमें शांति की कोशिशें नाकाम ही रहेंगी। अगर हमें बचे रहना है तो हथियार उठाना ही होगा।”
– “बिन लादेन ने अमेरिका को ही अपने सबसे बड़ा दुश्मन करार दिया था। तब तक सुरक्षा स्थापित नहीं हो सकती, जब तक सेनाएं मोहम्मद की धरती नहीं छोड़ देतीं।”

इजरायलियों का जश्न, विरोध की तैयारी में फिलीस्तीनी
– उधर, 13 मई को इजरायल में येरुशलम डे के मौके पर अमेरिकी समर्थकों ने मार्च निकाला। वहीं, आज अमेरिका अपना राजदूत तेल अवीव से येरुशलम शिफ्ट करेगा।
– 1948 में इजरायल ने आजादी की घोषणा करते हुए खुद को एक अलग देश के रूप में मान्यता दी थी। इस दौरान इजरायल से करीब 7 लाख फिलिस्तीनियों को देश छोड़कर जाना पड़ा था।
– सारे घटनाक्रम के बीच फिलिस्तीनियों ने गाजा पट्टी में बड़े प्रदर्शन की तैयारी की है।

इसलिए हो रहा बवाल
– इजरायल पूरे येरूशलम को राजधानी बताता है, जबकि फिलिस्तीनी पूर्वी येरूशलम को अपनी राजधानी बताते हैं।
– इस इलाके को इजरायल ने 1967 में कब्जे में ले लिया था। यहां यहूदी, मुस्लिम और ईसाई तीनों धर्मों के पवित्र स्थल हैं। यहां स्थित टेंपल माउंट जहां यहूदियों का सबसे पवित्र स्थल है, वहीं अल-अक्सा मस्जिद को मुसलमान पाक मानते हैं।

येरूशलम में किसी भी देश की एम्बेसी नहीं
– यूएन और दुनिया के ज्यादातर देश पूरे येरूशलम पर इजरायल के दावे को मान्यता नहीं देते।
– 1948 में इजरायल ने आजादी की घोषणा की थी। यहां किसी भी देश की एम्बेसी नहीं है। 86 देशों की एम्बेसी तेल अवीव में हैं।

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