Friday , May 26 2017
Home / History

History

अरब: अब्बासी दौर के सबसे प्रसिद्ध संगीतकार ‘अलमोसली’ के जनाज़े की नमाज़ खलीफ़ा मामून रशीद ने पढ़ाई थी

रियाद: अरब संगीतकार इब्राहीम अलमोसली को अब्बासी युग के सबसे प्रसिद्ध गायकों में जाना जाता है। उसका असली नाम इब्राहिम बिन मैमून था। वह इराक के शहर कूफ़ा में 742 में पैदा हुए और 804 में बगदाद में उनकी म्रृत्यु हुई। Facebook पे हमारे पेज को लाइक करने के लिए …

Read More »

मोदी के मंत्री एमजे अकबर ने कहा- भाईचारा बढ़ाने के लिए शाहजहां ने दारा शिकोह को उत्ताराधिकारी चुना

नई दिल्ली- विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने गुरुवार को कहा कि मुगल शासक शाहजहां ने औरंगजेब के बजाय अपना उत्तराधिकारी दारा शिकोह को इसलिए बनाना पसंद किया था क्योंकि शाहजहां को पता था कि जनता का दिल को बिना जीते शासन नहीं किया जा सकता है। शाहजहां भाईचारे के ज़रिए …

Read More »

दिल्ली की शहरी विरासत के अनमोल भाग को नष्ट किया गया

प्रगति मैदान में ‘द हॉल ऑफ़ नेशंस’ और ‘द हॉल ऑफ़ इंडस्ट्रीज़’ को तोड़ दिया गया। सरकार ने पहली बार नवंबर 2015 में पूरे प्रगति मैदान परिसर को फिर से बनाने की योजना की घोषणा की थी और कहा था की इसे “राज्य के अत्याधुनिक” प्रदर्शनी मैदान मे बदल दिया …

Read More »

मुसलमानों ने दिए थे हिन्दुस्तान की आज़ादी के सभी बड़े नारे

कभी भारत माता की जय तो कभी वंदे मातरम् के नाम पर भारत के मुसलमानों को निशाना बनाया जाता है। खुद को राष्ट्रवादी घोषित करने वाले मुसलमानों से राष्ट्रभक्ति का सबूत मांगते हैं लेकिन वो भूल जाते हैं कि मुसलमान भारत की रूह हैं। उन्हें देशभक्ति साबित करने की कोई …

Read More »

कट्टरपंथी हमेशा से सुधार के ख़िलाफ़ रहे हैं, हिंदू कोड बिल का हिंदुओं ने भी किया था विरोध

धर्म के बनाए नियम कायदों सामाजिक सुधार के लिए कोई बदलाव लाया जाता है कट्टरपंथी उसका विरोध करते हैं फिर वो चाहे किसी भी धर्म के हों। आज जिस तरह से तीन तलाक को लेकर मुस्लिम कट्टरपंथी विरोध कर रहे है कुछ ऐसी ही हालत आज़ादी के बाद हिंदू कट्टरपंथियों …

Read More »

5 हज़ार साल से जारी ‘आबे ज़मज़म’ के कुँए की कहानी…

मक्का: खाना काबा से केवल 20 मीटर दूर ज़मज़म का कुआं ग्रह पर पानी का सबसे पुराना चश्मा करार दिया जाता है जिसकी उम्र पांच हजार साल से ज़्यादा है। जैसा कि ऐतिहासिक परंपराओं में वर्णित है कि जमजम का चश्मा इब्राहीम (अ स) के पुत्र हज़रत इस्माईल (अ स) …

Read More »

‘ब्रिटिश शिक्षा के खिलाफ ‘बापू’ की बुनियादी शिक्षा की सोच को अमली जामा पहनाने के लिए जामिया बना’

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कानफ्लिक्ट रेजलूशन सेंटर की तरफ से ‘महात्मा गांधी और इस्लाम’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में जर्मनी की हिडलबर्ग यूनिवर्सिटी में इतिहास विभाग की प्रोफेसर गीता धर्माचार्य फ्रिक ने कहा कि गांधी कहा करते थे कि …

Read More »

जहांगीर और नूरजहां ने भी खेली थी होली, शाहजहाँ के वक़्त होली को ईद-ए-गुलाबी कहते थें

बहादुर शाह जफ़र द्वारा लिखा गया होली का फाग ‘क्यों मोपे मारी रंग की पिचकारी, देखो कुँअर जी दूंगी गारी, आज भी गाया जाता हैं जो मुग़ल काल के होली प्रेम की अनायास याद दिला देता है। मशहूर मुस्लिम पर्यटक अलबरूनी ने अपनी ऐतिहासिक यात्रा संस्मरण में मुगलों की होली …

Read More »

मंदिरों का सबसे बड़ा रखवाला था औरंगजेब: अमेरिकी इतिहासकार

“जो है नाम वाला, वही तो बदनाम है” -ये अल्फाज़ मुग़ल बादशाह औरंगजेब के ऊपर सबसे ज्यादा फिट बैठते हैं. क्योंकि भारतीय इतिहास में बादशाह औरंगजेब को बदनाम करने के लिए सब से ज्यादा दुष्प्रचार किया हैं. लेकिन सच-सच होता हैं, जो कभी न कभी सामने आ ही जाता हैं. …

Read More »

हक़ीम अजमल खान की योमे पैदाइश को राष्ट्रिय यूनानी दिवस मनाने का एलान

सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ़ यूनानी मेडिसिन में 11 फ़रवरी को किया जायेगा राष्ट्रिय यूनानी दिवस के समारोह का आयोजन। भारत के स्वतंत्रता सैनानी एवं जाने माने यूनानी मेडिकल के चिकित्सक हक़ीम अजमल खान की जन्मशती पर राष्ट्रिय यूनानी दिवस मनाया जाएगा। हक़ीम अजमल खान जी का जन्म 1858 में हुआ …

Read More »

बादशाह खां की 127 वी यौमे पैदाइश

  (6 फरवरी 1890 – 20 जनवरी 1988) जब भी जेल में रहकर संघर्ष करने की बात आती है, तो हम याद करते हैं या नेल्सन मंडेला को या फिर आंग सान सू की को। सू की को 15 वर्ष तक और नेल्सन मंडेला को 27 वर्ष तक। लेकिन यह …

Read More »

असलियत में कोई पद्मावती थी ही नहीं : इतिहासकार इरफान हबीब

जयपुर : जयपुर में जाने माने फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के सेट पर करणी सेना के हमले के बाद इतिहासकार भी इस मामले में सामने आ गए हैं. वरिष्ठ इतिहासकार इरफान हबीब ने दावा किया है कि जिस पद्मावती के अपमान को मुद्दा बनाकर करणी सेना …

Read More »

अज्ञात शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को इतिहासकारों की मदद से लाया जाएगा सामने : दिल्ली सरकार

दिल्ली सरकार देश भर के शोधकर्ताओं की मदद से शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों की प्रमाणीकृत जानकारी जुटा कर, इनके लिए समर्पित वेबसाइट पर डालेगी जो पिछले साल ही लांच की गई है| दिल्ली के श्रम मंत्री गोपाल राय ने बताया की सरकार इस साल मार्च में स्वतंत्रता सेनानियों के ऊपर …

Read More »

C.I.A. का बड़ा खुलासा, आरएसएस पर सैन्य अफसरो को भड़काने का आरोप, जनरल करियप्पा के हत्या का प्रयास में 6 लोगो मिली थी फांसी

शम्स तबरेज़, सियासत ब्यूरो। अमेरिकी खुफिया एजेण्सी सीआईए ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानि आरएसएस से जुड़ा एक चौकाने वाला खुलासा किया है। सीआईए ने इण्टरनेट पर किए गए सार्वजनिक दस्तावेज के अनुसार भारत की आज़ादी के लगभग तीन साल बाद 1950 में पहले फिल्ड मार्शल जनरल करियप्पा को जान …

Read More »

61 वी बरसी पर याद किए गए हॉकी खिलाड़ी शहीद बदरूद्दीन खाँ

शम्स तबरेज़, सियासत ब्यूरो। लखनऊ: गाज़ीपुर के कमसारों बार खित्ते में हॉकी खिलाड़ी शहीद बदरूद्दीन खाँ की शक्सियत को कौन नहीं जानता। उनको इस दुनियाँ से गए 61 साल बीत गए है, लेकिन ऐसा लगता है, जैसे वो अपने मज़ारे पाक से उठ खड़े होंगे। हर साल 23 जनवरी को …

Read More »

हॉकी खिलाड़ी “शहीद बदरूद्दीन खाँ” जिन्हें इतिहास ने भुला दिया

शम्स तबरेज़, ब्यूरो रिपोर्ट। लखनऊ: उत्तर प्रदेश के ज़िला गाज़ीपुर के रहने वाले मशहूर हॉकी प्लेयर बदरूद्दीन खाँ के पोत शहाबुद्दीन खाँ ने सियासत से अपने दादा की के अंतिम क्षणों को प्रकाशित करने का अनुरोध किया है जिनकी भावनओं का सम्मान करते हुए, सियासत मरहूम को श्रृद्धांजलि प्रस्तुत करता …

Read More »

आखिरकार मुर्शिदाबाद को मिल ही गया नवाब

मुर्शिदाबाद: नवाबों की नगरी मुर्शिदाबाद को आखिरकार नवाब मिल ही गया। मीर कासिम के परिवार से संबंध रखने वाले मुर्शिदाबाद के पहले नवाब नवाब हसन अली मिर्जा के नवासे को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराधिकारी बताते हुए मुर्शिदाबाद का नवाब बताया है। Facebook पे हमारे पेज को लाइक करने के लिए …

Read More »

देश के लिए हंसते हंसते सूली पर चढ़ जाने वाले ‘शेख भिखारी’ को इतिहास ने भुला दिया

रांची: देश को अंग्रेजों से मुक्त कराने के आंदोलन में एक नाम शेख भिखारी का भी है। झारखंड के शेख भिखारी 9 जनवरी 1857 को अपने साथी टिकैत उमराव सिंह के साथ फांसी दे दी गई थी। लेकिन देश की खातिर जान न्यौछावर कर देने वाले इस स्वतंत्रता सेनानी को …

Read More »

फांसी के दस साल बाद भी लोगों के दिलों में छाए हैं सद्दाम हुसैन

25 साल से ज्यादा वक्त तक इराक पर राज करने वाले सद्दाम हुसैन को बकरीद और नए साल से एक दिन पहले शनिवार सुबह फांसी दे दी गई थी। इस घटना को 10 साल का समय बीत गया लेकिन वहां के लोगों के दिलों दिमाग में सद्दाम हुसैन आज भी …

Read More »

बलिदान की कहानियां: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय मुस्लिम सैनिकों के अपने परिजनों को लिखे गए पत्र

“हम एक ऐसी दुकान में गए जहाँ लगभग 2000 लोग काम करते हैं और वहां से सबकुछ खरीदा जा सकता है,” प्रथम विश्व युद्घ के दौरान ब्राइटन में तैनात एक भारतीय मुस्लिम सैनिक ने लिखा। “यहाँ किसी भी चीज़ की कीमत पूछने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उस पर पहले …

Read More »
TOPPOPULARRECENT