Friday , March 24 2017
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जहांगीर और नूरजहां ने भी खेली थी होली, शाहजहाँ के वक़्त होली को ईद-ए-गुलाबी कहते थें

बहादुर शाह जफ़र द्वारा लिखा गया होली का फाग ‘क्यों मोपे मारी रंग की पिचकारी, देखो कुँअर जी दूंगी गारी, आज भी गाया जाता हैं जो मुग़ल काल के होली प्रेम की अनायास याद दिला देता है। मशहूर मुस्लिम पर्यटक अलबरूनी ने अपनी ऐतिहासिक यात्रा संस्मरण में मुगलों की होली …

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मंदिरों का सबसे बड़ा रखवाला था औरंगजेब: अमेरिकी इतिहासकार

“जो है नाम वाला, वही तो बदनाम है” -ये अल्फाज़ मुग़ल बादशाह औरंगजेब के ऊपर सबसे ज्यादा फिट बैठते हैं. क्योंकि भारतीय इतिहास में बादशाह औरंगजेब को बदनाम करने के लिए सब से ज्यादा दुष्प्रचार किया हैं. लेकिन सच-सच होता हैं, जो कभी न कभी सामने आ ही जाता हैं. …

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हक़ीम अजमल खान की योमे पैदाइश को राष्ट्रिय यूनानी दिवस मनाने का एलान

सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ़ यूनानी मेडिसिन में 11 फ़रवरी को किया जायेगा राष्ट्रिय यूनानी दिवस के समारोह का आयोजन। भारत के स्वतंत्रता सैनानी एवं जाने माने यूनानी मेडिकल के चिकित्सक हक़ीम अजमल खान की जन्मशती पर राष्ट्रिय यूनानी दिवस मनाया जाएगा। हक़ीम अजमल खान जी का जन्म 1858 में हुआ …

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बादशाह खां की 127 वी यौमे पैदाइश

  (6 फरवरी 1890 – 20 जनवरी 1988) जब भी जेल में रहकर संघर्ष करने की बात आती है, तो हम याद करते हैं या नेल्सन मंडेला को या फिर आंग सान सू की को। सू की को 15 वर्ष तक और नेल्सन मंडेला को 27 वर्ष तक। लेकिन यह …

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असलियत में कोई पद्मावती थी ही नहीं : इतिहासकार इरफान हबीब

जयपुर : जयपुर में जाने माने फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के सेट पर करणी सेना के हमले के बाद इतिहासकार भी इस मामले में सामने आ गए हैं. वरिष्ठ इतिहासकार इरफान हबीब ने दावा किया है कि जिस पद्मावती के अपमान को मुद्दा बनाकर करणी सेना …

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अज्ञात शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को इतिहासकारों की मदद से लाया जाएगा सामने : दिल्ली सरकार

दिल्ली सरकार देश भर के शोधकर्ताओं की मदद से शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों की प्रमाणीकृत जानकारी जुटा कर, इनके लिए समर्पित वेबसाइट पर डालेगी जो पिछले साल ही लांच की गई है| दिल्ली के श्रम मंत्री गोपाल राय ने बताया की सरकार इस साल मार्च में स्वतंत्रता सेनानियों के ऊपर …

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C.I.A. का बड़ा खुलासा, आरएसएस पर सैन्य अफसरो को भड़काने का आरोप, जनरल करियप्पा के हत्या का प्रयास में 6 लोगो मिली थी फांसी

शम्स तबरेज़, सियासत ब्यूरो। अमेरिकी खुफिया एजेण्सी सीआईए ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानि आरएसएस से जुड़ा एक चौकाने वाला खुलासा किया है। सीआईए ने इण्टरनेट पर किए गए सार्वजनिक दस्तावेज के अनुसार भारत की आज़ादी के लगभग तीन साल बाद 1950 में पहले फिल्ड मार्शल जनरल करियप्पा को जान …

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61 वी बरसी पर याद किए गए हॉकी खिलाड़ी शहीद बदरूद्दीन खाँ

शम्स तबरेज़, सियासत ब्यूरो। लखनऊ: गाज़ीपुर के कमसारों बार खित्ते में हॉकी खिलाड़ी शहीद बदरूद्दीन खाँ की शक्सियत को कौन नहीं जानता। उनको इस दुनियाँ से गए 61 साल बीत गए है, लेकिन ऐसा लगता है, जैसे वो अपने मज़ारे पाक से उठ खड़े होंगे। हर साल 23 जनवरी को …

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हॉकी खिलाड़ी “शहीद बदरूद्दीन खाँ” जिन्हें इतिहास ने भुला दिया

शम्स तबरेज़, ब्यूरो रिपोर्ट। लखनऊ: उत्तर प्रदेश के ज़िला गाज़ीपुर के रहने वाले मशहूर हॉकी प्लेयर बदरूद्दीन खाँ के पोत शहाबुद्दीन खाँ ने सियासत से अपने दादा की के अंतिम क्षणों को प्रकाशित करने का अनुरोध किया है जिनकी भावनओं का सम्मान करते हुए, सियासत मरहूम को श्रृद्धांजलि प्रस्तुत करता …

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आखिरकार मुर्शिदाबाद को मिल ही गया नवाब

मुर्शिदाबाद: नवाबों की नगरी मुर्शिदाबाद को आखिरकार नवाब मिल ही गया। मीर कासिम के परिवार से संबंध रखने वाले मुर्शिदाबाद के पहले नवाब नवाब हसन अली मिर्जा के नवासे को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराधिकारी बताते हुए मुर्शिदाबाद का नवाब बताया है। Facebook पे हमारे पेज को लाइक करने के लिए …

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देश के लिए हंसते हंसते सूली पर चढ़ जाने वाले ‘शेख भिखारी’ को इतिहास ने भुला दिया

रांची: देश को अंग्रेजों से मुक्त कराने के आंदोलन में एक नाम शेख भिखारी का भी है। झारखंड के शेख भिखारी 9 जनवरी 1857 को अपने साथी टिकैत उमराव सिंह के साथ फांसी दे दी गई थी। लेकिन देश की खातिर जान न्यौछावर कर देने वाले इस स्वतंत्रता सेनानी को …

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फांसी के दस साल बाद भी लोगों के दिलों में छाए हैं सद्दाम हुसैन

25 साल से ज्यादा वक्त तक इराक पर राज करने वाले सद्दाम हुसैन को बकरीद और नए साल से एक दिन पहले शनिवार सुबह फांसी दे दी गई थी। इस घटना को 10 साल का समय बीत गया लेकिन वहां के लोगों के दिलों दिमाग में सद्दाम हुसैन आज भी …

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बलिदान की कहानियां: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय मुस्लिम सैनिकों के अपने परिजनों को लिखे गए पत्र

“हम एक ऐसी दुकान में गए जहाँ लगभग 2000 लोग काम करते हैं और वहां से सबकुछ खरीदा जा सकता है,” प्रथम विश्व युद्घ के दौरान ब्राइटन में तैनात एक भारतीय मुस्लिम सैनिक ने लिखा। “यहाँ किसी भी चीज़ की कीमत पूछने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उस पर पहले …

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जन्मदिन विशेष: हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक अशफाक़ उल्लाह ख़ान की कहानी और काकोरी काण्ड में उनका योगदान

अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ भारत के दिल अज़ीज़ स्वतंत्र-सेनानी थे जिन्होनें काकोरी काण्ड में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी. ब्रिटिश शासन ने उनके ऊपर मुक़दमा चलाया और 19 दिसम्बर सन् 1927 को उन्हें फैजाबाद जेल में फाँसी पर लटका कर मार दिया गया. राम प्रसाद बिस्मिल की भाँति अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ भी …

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बर्थडे स्पेशल: अपने समय के सबसे प्रभावशाली मुस्लिम नेता थे सर सैयद अहमद ख़ान

सैयद अहमद ख़ाँ का जन्म 17 अक्टूबर 1817 में दिल्ली के सादात (सैयद) ख़ानदान में हुआ था. सर सैयद अहमद खान हिन्दुस्तानी शिक्षक और नेता थे जिन्होंने भारत के मुसलमानों के लिए आधुनिक शिक्षा की शुरुआत की. उन्होने मुहम्मदन एंग्लो-ओरिएण्टल कालेज की स्थापना की जो बाद में विकसित होकर अलीगढ़ …

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ब्रिगेडियर उस्मान और वीर अब्दुल हमीद को शहीद नहीं मानती MP की भाजपा सरकार

भोपाल: देश की रक्षा में अपनी जान कुर्बान कर देने में मुसलमान हमेशा आगे रहे हैं। पाकिस्तान से हुई तीनों युद्धों में हजारों मुस्लिम जवानों ने सीमा पर अपने दूसरे साथी जवानों के साथ न केवल हमेशा बराबरी का मोर्चा संभाला है बल्कि वह आगे भी रहे हैं। सैकड़ों ऐसे …

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इस्लाम क़ुबूल करने वाले ब्रिटेन के मशहूर हस्तियों पर एक नज़र!

लंदन: सऊदी अरब में उल्लिखित ब्रिटिश राजदूत साइमन कोलिस और उनकी पत्नी के इस्लाम क़ुबूल करने के बाद और हज अदा करने की खबरों और तस्वीरों ने दुनिया भरमें एक तहलका मचा दिया है। पूरी दुनिया में ब्रिटिश राजदूत के मुशर्रफ ब इस्लाम होने के चर्चे हैं। साइमन कोलेज़ और …

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जानिए शाह अब्दुल अज़ीज़ ने ‘बाबे काबा’ कैसे बनवाया?

रियाद: सऊदी अरब के संस्थापक शाह अब्दुल अजीज बिन अब्दुल रहमान आले सऊद ने सत्ता संभालने के बाद बैतुल्लाह का ख्याल रखने की जिम्मेदारियां निभाने का फैसला किया। Facebook पे हमारे पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करिये बैतुल्लाह के अन्य अनुकरण के साथ सन् 1363 हिजरी में उन्होंने …

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“काबा” के दरवाजे साल में दो बार क्यों खुलते हैं?

रियाद: कौन है जो अल्लाह के घर यानी “काबा” के अंदर प्रवेश नहीं करना चाहता, वह जिस घर के आसपास पूरी दुनिया से आए लाखों मुसलमान तवाफ़ करते हैं। अतीत में काबे का दरवाजा हर महीने दो से तीन बार खोला जाता था ताकि सभी लोगों को प्रवेश का मौका …

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बुर्का तो रहा एक तरफ़, जर्मनी में कभी “जींस” पर भी थी पाबंदी

बर्लिन: जर्मनी में पिछले कुछ समय से बुर्के पर प्रतिबंध के संबंध में चर्चा की जा रही है। लेकिन परिधान पर प्रतिबंध के संबंध में ऐसी बहसें कोई नई बात नहीं। एक दौर में पूर्वी जर्मनी में जींस पहनने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। Facebook पे हमारे पेज को …

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