Monday , June 26 2017
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जब आसपास कत्लेआम हो रहे हो तो ईद की ख़ुशी कैसे मनाई जाए

“खिज़ां में मुझको रुलाती है याद-ए-फ़स्ल-ए-बहार ख़ुशी हो ईद की क्योंकर के सोगवार हूं मैं” “शरजील ईमाम, मेरे भाई, ये क्या बात है कि आज ईद के दिन, यानी ख़ुशी के दिन तुम सोगवार हो? तुमको किस बात का ग़म है जिसका इज़हार अल्लामा इक़बाल के शेर के ज़रिये से …

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हिन्दी पट्टी पाठक और पत्रकार गोबर हो चुके मुद्दों को अलावा दूसरी चीज़ों पर भी ध्यान दें: रवीश कुमार

बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार के अनुसार टाटा टेलिकाम सर्विसेस ने बैंकों से कहा है कि उस पर जो 29,000 करोड़ का कर्ज़ है, उसे चुकाने के लिए कई तरह की रियायतें दी जाएं जिसे अंग्रेज़ी में restructure कहते हैं। टाटा टेलिकाम का कहना है कि 2016-17 में उसके नेट वर्थ में …

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बिगड़ती अर्थव्यवस्था और बेरोज़गारी के बीच अब मोदी सरकार सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे सकती है: द इकॉनोमिस्ट

ब्रिटेन की प्रतिष्ठित साप्ताहिक पत्रिका ‘द इकॉनोमिस्ट’ ने  गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी भूमिका को याद करते हुए चिंता व्यक्त की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा कर अपनी लोकप्रियता को बनाए रखने की कोशिश करेंगे क्योंकि अर्थव्यवस्था में गिरावट शुरू हो गई …

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योग पर फालतू तस्वीरें दिखाने वाले चैनलों ने ही जनता का गला घोंट दिया है: रवीश कुमार

टीवी में तो ग्राउंड रिपोर्टिंग खत्म ही हो गई है। इक्का दुक्का संवाददाताओं को ही जाने का मौका मिलता है और दिन भर उन पर लाइव करने का इतना दवाब होता है कि वे डिटेल में काम ही नहीं कर पाते हैं। जब तक वे रिपोर्ट बनाने की नौबत आती …

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‘भाजपा के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार कोविंद अंबेडकरवादी नहीं, हिन्दूवादी विचारों के दलित हैं’

राष्ट्रपति पद के लिये सत्ताधारी भाजपा का प्रत्याशी घोषित होने के कुछ ही देर बाद बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने दिल्ली रवाना होने से पहले पटना में अपने शुभचिंतकों और पत्रकारों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया तो उनकी दाहिनी कलाई में बंधा लाल धागों वाला ‘कलावा’ उनकी शर्ट और कोट से …

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आडवाणी एकांत में रोते होंगे! सिसकते होंगे या क्या कमरे में बैठे-बैठे कभी चीखने लगते होंगे?- रवीश कुमार

लाल कृष्ण आडवाणी का एकांत भारत की राजनीति का एकांत है। हिन्दू वर्ण व्यवस्था के पितृपुरुषों का एकांत ऐसा ही होता है। जिस मकान को जीवन भर बनाता है, बन जाने के बाद ख़ुद मकान से बाहर हो जाता है। वो आंगन में नहीं रहता है। घर की देहरी पर …

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गाय को माता कहकर कुछ देशभक्त बन रहे है और कुछ डर के साये में जीने को मजबूर हैं…

आज कल कोई भी न्यूज़ पेपर हो या कोई न्यूज़ चैनल… ऐसा लगता है कि जैसे हर तरफ़ एक अजीब सा खौफ़ का माहौल पनप गया है. कोई गाय को माता कहकर देशभक्त बन रहा है और कुछ डर के साये में जीने को मजबूर हैं. बेचारी गाय को यह …

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महाराष्ट्र: क़र्ज़ माफ़ी का ऐलान धोखा है, PM मोदी के झूठे वादे और झांसे से खफा हैं किसान

महाराष्ट्र के किसान पीएम नरेंद्र मोदी के झूठे वादे से बेहद खफा हैं। विदर्भ में 2014 में लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान आए पीएम ने फसलों की ज्यादा कीमत दिलाने का वादा किया था। लेकिन किसानों को फसल की आधी कीमत भी नहीं मिली। महाराष्ट्र के किसानों के लिए कर्ज …

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मोदी सरकार के इस मंत्रालय का नाम ‘रोबोट मंत्रालय’ होना चाहिए: रवीश कुमार

मोदी सरकार के तीन साल पूरा होने पर शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने शहरी विकास मंत्रालय के काम को लेकर कई चमत्कारिक दावे किये हैं। तीन साल में सिर्फ अमृत मिशन के तहत 6,737 की मंज़ूरी के आंकड़े ने मुझे हैरान कर दिया। मैंने साल के 365 दिनों में …

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स्पेशल रिपोर्ट: ‘मौत के रेगिस्तान में तब्दील होता बुंदेलखंड’

वीरों की धरती बुंदेलखंड अब विलाप और पलायन का पर्याय बन गयी है। बुंदेलखंड की त्रासदी न सिर्फ हमारी विकास की कथित उपलब्धियों का मजाक उड़ाती है, बल्कि यह हमारे नीति-नियंताओं की समझ और संवेदना पर भी सवाल खड़ा करती है। लगातार पिछले कई सालों से यह इलाका सूखे की …

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…और PM मोदी के नए इंडिया में किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया: रवीश कुमार

फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने लिखा है कि 500 कंपनियों ने मार्च की अपनी तिमाही रिपोर्ट में नुकसान दिखाया है। पिछली पांच तिमाही में यह सबसे ज़्यादा है। इतनी बड़ी संख्या में कंपिनयों ने घाटे की रिपोर्ट नहीं दी थी। बिजनेस स्टैंडर्ड का कहना है कि कच्चे माल के दाम धीमी गति …

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मोदी सरकार के फ़ैसले की मार मांस कारोबारियों पर नहीं, ग़रीब किसानों पर पड़ेगी: रवीश कुमार

पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण नियम की अधिसूचना को ध्यान से पढ़ना चाहिए। अभी तक इसे लेकर मांस व्यापार के संदर्भ में ही मुख्य रूप से चर्चा हो रही है लेकिन यह नियम पशु मंडियों को जिस तरह परिभाषित करता है, जैसे उनके मापदंड बनाए गए हैं, उसके अनुसार …

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‘नहीं सर! वह हिंदू है…उसे प्यास लगी है…पानी दे दो…मेरा रोज़ा चल रहा है’

दसवीं मंजिल पर कमरे की खिड़की से अपनी बेटी को बाहर की दुनिया दिखा रहा था। अचानक एक नौजवान  रस्सी से लटका हुआ खिड़की पर आ गया। पानी चाहिए। इतनी ऊंचाई पर निडर होकर वह उन दीवारों को रंग रहा था जिसके रंगीन होने का सुख शायद ही उसे मिले। …

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मोदी सरकार एक साल में 5 लाख नौकरियां भी नहीं पैदा कर पा रही, 1 करोड़ तो छोड़ ही दीजिए: रवीश कुमार

नौकरियों पर जब भी फोकस होता है, बोगस मुद्दे उछाले जाने लगते हैं। 23 मई के बिजनेस स्टैंडर्ड में महेश व्यास का लेख है। महेश व्यास सेंटर फार मानिटरिंग इंडियन इकोनोमी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक है। इनकी संस्था के विश्लेषणों को गंभीरता से लिया जाता है। महेश व्यास का कहना …

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मोदी राज में खून की प्‍यासी क्‍यों हो रही है भीड़?

मुन्नाभाई एम.बी.बी.एस फिल्म में एक सीन आपको याद होगा. जब मुन्ना (संजय दत्त) के पिता हरि प्रसाद शर्मा (सुनील दत्त) और मां पार्वती अपने बेटे से मिलने मुंबई शहर में आते हैं. उस वक्त एक चोर उनका पर्स चुरा लेता है और पकड़ा जाता है. जिसके बाद स्टेशन पर खड़ी …

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अभिसार शर्मा का ब्लॉग- ‘बच्चे चोरी ही नही हुए और 7 घरों के चिराग तुमने बुझा दिए!’

हम अंदर से मर चुके हैं। हम एक शख्स की भक्ति में इस कदर लीन हैं, इस कदर…कि हमने हकीकत देखने से इंकार कर दिया है। हम सोचते हैं कि देश के कुछ लोग नर्क में जलते रहेंगे और वो आग हम तक कभी नहीं पहुंचेगी। हम अछूते रहेंगे, लिहाज़ा …

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याकूब की फांसी के ख़िलाफ़ थे साल्वे, अब ‘देशभक्त’ कैसे?

इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने पाकिस्तान में कैद भारतीय नागरिक कुलभूषण यादव की फांसी की सजा पर अंतिम फैसला आने तक रोक लगा दी तो भारत का पक्ष रखने वाले वकील हरीश साल्वे का चारों ओर गुणगान होने लगा। सोशल मीडिया के धुरंधरों के लिए हरीश प्रखर राष्ट्रवाद के अपराजित …

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इस वक्त भारत का आलसी विपक्ष अपने स्वार्थों और घोटालों में धंसा हुआ है: रवीश कुमार

प्रधानमंत्री बनने के लिए महत्वकांक्षा है न योग्यता। सुनने में थोड़ा विचित्र लगेगा कि मैं 2019 में प्रधानमंत्री का दावेदार नहीं हूं। यह बयान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का है। उन्होंने कहा कि लोगों को जिस व्यक्ति में क्षमता नज़र आ जाएगी, वो प्रधानमंत्री बन जाएगा। लोगों ने पिछले …

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मीडिया का काम योगी और मोदी के 10 मुहावरे पैदा करना रह गया है: रवीश कुमार

दो दिन से सोचता रहा कि चीन ने जो सम्मेलन बुलाया है, वो क्या है, क्यों भारत का जाना या न जाना ठीक है, उस पर पढ़ाई करूंगा। लेकिन जाने कहां वक्त धूल की तरह उड़कर चला गया। जस्टिस कर्णन से जुड़े विवाद से संबंधित एक भी ख़बर नहीं देख …

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…इसलिए मैंने इस्लाम कुबूल किया!

थेरेसा कार्बिन, कैथोलिक ईसाई परिवार में पैदा हुईं और बाद में 21 वर्ष की उम्र में मज़हब बदलकर मुस्लिम बनीं। इस्लाम में आने के बाद उनके अंदर बहुत से बदलाव हुए। वे एक लेखिका हैं। ये “ऑरलियंस, लुइसियाना” में रहती हैं और “इस्लामविच” की संस्थापिका हैं। इस्लाम के बारे में …

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